तेजी से बढ़ते डेंगू के प्रकोप पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए हरियाणा, पंजाब, यूटी और केंद्र को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। जस्टिस अमित रावल ने चीफ जस्टिस को लिखे पत्र में विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचारों का जिक्र करते हुए मोहाली समेत पंजाब और हरियाणा में डेंगू के बढ़ते मामलों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मोहाली में डेंगू का प्रकोप इतना अधिक है कि अभी हाल ही में सौंपे गए 1759 संदिग्ध मामलों में से 1200 पॉजिटिव पाए गए थे।
वहीं, हरियाणा में अभी तक डेंगू के 1443 मामले सामने आए हैं। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार नागरिकों के स्वास्थ्य, साफ-सफाई की व्यवस्था उपलब्ध करवाने के लिए बाध्य है। यदि राज्य सरकार विफल रहती है तो केंद्र सरकार की जिम्मेदारी बनती है। इस मामले में डेंगू का प्रकोप बढ़ता गया और सरकार व व्यवस्था हाथ पर हाथ रखे बैठी रही।
विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा लगातार दी गई चेतावनियों को भी ध्यान में नहीं रखा गया। न तो यहां कोई डेंगू कंट्रोल प्रोग्राम बनाया गया और न ही कोई रिसर्च प्रोग्राम। हाईकोर्ट ने कहा कि इस पर जल्द से जल्द नियंत्रण पाना जरूरी है। इसके लिए कम्यूनिटी को भी शामिल किया जाना जरूरी है। उन्हें शिक्षित करके, जागरूक बनाने या फिर कानूनी प्रावधान बनाकर मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों को रोका जाए।
जिम्मेदारी तय की जाए
सरकारी इमारतों, दफ्तरों और संस्थानों में डेंगू के लारवा पलने की बात करते हुए जस्टिस अमित रावल ने कहा कि यह बड़ा संजीदा विषय है और कम से कम सरकारी भवनों में ऐसा नहीं होने देना चाहिए था। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि चाहे कुछ भी हो सबसे पहले सरकारी इमारतों से इनका सफाया किया जाए। कोर्ट ने कहा कि लोग बीमारियों का शिकार न हो इसके लिए पूरी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। इस केस की सुनवाई के दौरान विभिन्न प्रकार की वेक्टर बॉर्न बीमारियों को लेकर बहस होगी। जो भी जिम्मेदार पाया गया उसे किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।