किसानों के सुसाइड मामले में जनहित याचिका के माध्यम से उठाए गए इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि खेती का लोन लेकर किसान बच्चों की शादी करवाता है। इसके बाद कर्ज न चुका पाने के चलते आत्महत्या को मजबूर हो जाता है। सरकार ने इस बारे में क्यों आंखें मूंदी हैं और क्यों नहीं खर्च और मेहमानों की संख्या को सीमित किया जाता। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी किसानों को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की।
मामले में याचिका दाखिल करते हुए पंजाब में किसानों और खेत मजदूरों की आत्महत्याओं का सिलसिला खत्म न होने की बात कही गई थी। याची ने कहा था कि सरकार बदलने पर भी फर्क नहीं पड़ा और कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के पहले महीने 16 तो दूसरे महीने 26 किसान आत्महत्या को मजबूर हुए।
याचिकाकर्ता ने बताया कि उसने वर्ष 2015 में भी राज्य में किसानों द्वारा की जा रही आत्म-हत्याओं को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याची मलकीत सिंह की ओर से कहा गया था कि पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़, पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला, पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी लुधियाना व अन्य संस्थानों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पंजाब में सन 2000 से लेकर अब तक कुल 10 हजार से ज्यादा किसान और खेत मजदूर आत्महत्या कर चुके हैं। ऐसे में इस मामले में यह देखा जाना चाहिए कि ऐसे कौन से कारक हैं जिनके चलते किसानों और खेत मजदूरों को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।