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आशुतोष महाराज के शरीर पर दिव्य ज्योति जागृति संस्थान का हक नहीं: हाईकोर्ट

Sat, 05 Aug 2017 10:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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आशुतोष महाराज - फोटो : File Photo
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हाईकोर्ट द्वारा आशुतोष महाराज के कथित पुत्र को डीएनए टेस्ट में सहयोग के लिए दिव्य ज्योति जागृति संस्थान को दिए गए आदेशों पर पुनर्विचार के लिए संस्थान ने  याचिका दायर की है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि यदि कथित पुत्र सिविल सूट दाखिल कर डीएनए टेस्ट की मांग करता है तो संस्थान उसका विरोध न करे। याचिका के माध्यम से संस्थान ने आपत्ति दर्ज करने की छूट मांगी थी जिसे शुक्रवार को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।
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याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि महाराज के शरीर पर संस्थान का अधिकार नहीं है। संस्थान के पास महाराज के शरीर को संरक्षित करने का अधिकार है। हाईकोर्ट इस मामले में दिलीप कुमार झा के कानूनी अधिकार से उसे वंचित नहीं कर सकता है। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अगर संस्थान को कोई आपत्ति है तो इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं।

संस्थान ने अपनी अर्जी में कहा था कि हाई कोर्ट के फैसले में विरोधाभास है क्योंकि एक ओर तो हाईकोर्ट ने ही झा द्वारा डीएनए टेस्ट की मांग को खारिज कर दिया था, लेकिन वहीं दूसरी ओर उसे इस मांग को लेकर सिविल कोर्ट में जाने की छूट दे दी थी। इतना ही नहीं अपने फैसले में हाईकोर्ट ने संस्थान को भी निर्देश दिया था कि अगर सिविल कोर्ट इस मामले में महाराज के डीएनए के आदेश देता है तो वह आपत्ति नहीं करेगा।  संस्थान के आपत्ति करने का अधिकार मांगने को हाईकोर्ट ने ख़ारिज कर दिया है।
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'हक साबित करने के अधिकार से वंचित नहीं रख सकते'

आशुतोष महाराज - फोटो : SELF
बता दें कि हाई कोर्ट ने 5 जुलाई को इस मामले में अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए कहा था कि वो संस्थान के धार्मिक मामले में दखल देना नहीं चाहती है। लिहाजा हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच द्वारा महाराज के शरीर के अंतिम संस्कार के जो आदेश दिए थे उन आदेशों को रद्द करते हुए संस्थान को महाराज के शरीर को संरक्षित रखे जाने के आदेश दिए हैं।

लेकिन महाराज के कथित पुत्र दलीप कुमार झा की डीएनए टेस्ट की मांग को खारिज करते हुए उसे इन मांग को लेकर सिविल सूट दायर करने के आदेश दे दिए थे। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने संस्थान को आदेश दिए हैं की अगर निचली अदालत महाराज के डीएनए टेस्ट के आदेश दे तो संस्थान इसमें किसी भी किस्म की कोई रुकावट नहीं पैदा करेगा। दिलीप कुमार झा के मामले में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों के खिलाफ ही संस्थान ने हाईकोर्ट में अर्जी दायर की थी।  
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