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हाईकोर्ट ने उठाया सवाल, दिल्ली के लिए उल्टी गंगा बहाने को क्यों तैयार रहता है केंद्र?

Wed, 29 Mar 2017 09:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo
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दिल्ली से बर्मिंघम और टोरंटो की फ्लाइट में 60 से 90 प्रतिशत यात्री पंजाब के होने के बावजूद एयर-इंडिया न तो खुद अमृतसर से सीधे बर्मिंघम और टोरंटो के लिए उड़ान शुरू कर रहा है और न ही किसी अन्य एयरलाइन को यह उड़ान शुरू करने की इजाजत दे रहा है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्र की नीति भी केवल दिल्ली पर केंद्रित रहती है और हमेशा दिल्ली राग सुनवाई देता है। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस प्रकार दिल्ली के हित के लिए इस क्षेत्र के हितों से समझौता किया जा रहा है, उससे यह साफ है कि दिल्ली वालों के लिए केंद्र उल्टी गंगा बहाने के लिए भी तैयार रहता है।
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मंगलवार को मामले की सुनवाई आरंभ होते ही याचिकाकर्ता अमृतसर विकास मंच ने आंकड़ों के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि दिल्ली से बर्मिंघम और टोरंटो की उड़ान में 60 से 90 प्रतिशत यात्री पंजाब से हैं। यह आंकड़े डीजीसीए की वेबसाइट से लिए गए हैं। इन आंकड़ों पर हाईकोर्ट ने एयर-इंडिया को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि क्या आपके लिए यात्रियों के हितों से ज्यादा सर्विस प्रोवाइडरों का हित महत्वपूर्ण है। 

हाईकोर्ट ने एयर इंडिया से जवाब तलब किया है कि क्यों सीधे अमृतसर से इंटरनेशनल फ्लाइट शुरू नहीं की जा रही है। हाईकोर्ट ने पूछा कि 2008 से पहले अमृतसर से सीधे इंटरनेशनल फ्लाइट्स थीं और उसमें यात्रियों की संख्या भी अच्छी थी तो क्यों और किन कारणों के चलते यह फ्लाइट्स यहां से बंद कर दिया गया। हाईकोर्ट को इस दौरान बताया गया कि अमृतसर से दिल्ली होकर बर्मिंघम जाने वाली उड़ान के लिए यात्रियों से 3 से 13 हजार रुपये अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं। 
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हरियाणा, पंजाब और यूटी उठाए सुरक्षा का भार

Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh - फोटो : File Photo
जस्टिस एसएस सारों व जस्टिस दर्शन सिंह की खंडपीठ ने एयर-इंडिया के अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि क्यों लोग सीधे अमृतसर से बर्मिंघम नहीं जा सकते, इसके लिए पहले दिल्ली जाना क्यों जरूरी किया जा रहा है। यह तो साफ तौर पर उल्टी गंगा बहाने जैसा ही है। दिल्ली के जरिये जाने से पहले तो भारी ट्रैफिक का सामना करो फिर बर्मिंघम या टोरंटो के लिए दोबारा इसी रूट पर वापस जब जाना ही पाकिस्तान के ऊपर से है तो फ्लाइट्स सीधे अमृतसर से शरू की जानी चाहिए। 2008 से पहले सीधे अमृतसर से ही यह फ्लाइट्स जाती थी। ऐसे में अब हाईकोर्ट ने एयर-इंडिया से पूछा है कि क्यों हर इंटरनेशनल फ्लाइट का हब दिल्ली को बनाया जा रहा है।

अमृतसर विकास मंच ने हाईकोर्ट में एक अर्जी दायर कर कहा कि अमृतसर एयरपोर्ट यूडीएफ (यूजर डेवलपमेंट फीस) के रूप में 950 रुपये लेता है, जबकि दिल्ली एयरपोर्ट 1500 रुपये बावजूद इसके फ्लाइट का लाभ दिल्ली को मिल रहा है और बाकी एयरपोर्ट घाटे में चल रहे हैं। दायर अर्जी में हाईकोर्ट को बताया गया कि पहले अमृतसर से इंटरनेशनल और घरेलू उड़ानों का अनुपात 80 और 20 का था, जो अब उलट कर 20:80 का हो गया है। साथ ही यह भी बताया गया कि दिल्ली ही एक ऐसा एयरपोर्ट है, जो अराइवल और डिर्पाचर दोनों के लिए यूडीएफ वसूल रहा है।

छोटे एयरपोर्ट व विमान पट्टियों के लिए विशेष योजना
केंद्र सरकार ने बताया कि देश में ऐसे सवा चार सौ के करीब छोटे एयरपोर्ट हैं, जहां फ्लाइट्स या तो नहीं हैं या नाममात्र हैं। केंद्र सरकार ने उड़ान योजना बनाई है, जिसके तहत इन छोटे एयरपोर्ट या विमान पट्टियों से छोटी दूरी की एक घंटे से कम की उड़ानें निजी विमान कंपनियों को सौंपी जाएंगी। इसके लिए कंपनियों से फ्लाइट्स शुरू करने का आग्रह किया गया है। इसके लिए उन्हें कई स्तरों पर विमान ईंधन और अन्य फीस की रियायत भी दी जा रही है। इस योजना के तहत पंजाब और हरियाणा के छोटे एयरपोर्ट को शामिल किए जाने की योजना है।

हरियाणा, पंजाब और यूटी उठाए सुरक्षा का भार
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सीआईएसएफ की सुरक्षा के लिए 33 करोड़ से अधिक का खर्च आता है और एयरपोर्ट की कमाई के साधन अभी सीमित हैं। ऐसे में हरियाणा, पंजाब और यूटी अगली सुनवाई पर इस बारे में जवाब दें कि 7 वर्ष के लिए वे इस सुरक्षा का भार उठा सकते हैं या नहीं। सात साल में एयरपोर्ट की आय के साधन विकसित हो जाएंगे और एयरपोर्ट खुद इस खर्च का निर्वाहन करने में सक्षम हो जाएगा। 
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