पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि यदि पैदल चलने वाला व्यक्ति हाईवे को लापरवाही से पार करता है और उसकी इस लापरवाही के कारण वह हादसे का शिकार होता है तो ऐसी स्थिति में वह महज आधे मुआवजे का ही हकदार है।
कोर्ट ने शाहाबाद (कुरुक्षेत्र) के मामले में यह भी कहा है कि ऐसे केस में यदि वाहन स्वामी की भी लापरवाही सामने आती है तो वह भी बराबर का दोषी माना जाएगा। अदालत ने इस टिप्पणी के साथ ट्रिब्यूनल द्वारा रिकार्ड किए गए आदेश को सही मानते हुए इस पर मुहर लगा दी है। वहीं मुआवजे से आधी राशि काटने को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है।
मामले में याचिका दाखिल करते हुए कहा गया था कि मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यनूल की ओर से मोटर वाहन एक्सीडेंट के मामले में क्लेम निर्धारित करते हुए मृतक और एक्सीडेंट करने वाले वाहन स्वामी की संयुक्त जिम्मेदारी मानी गई थी। इस निर्णय को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा गया कि मृतक एक्सीडेंट के दिन लघुशंका के लिए शाहाबाद के पास हाईवे के किनारे कच्चे में जा रहा था। इस दौरान एक मोटर साइकिल ने उसे टक्कर मार दी जिसके चलते उसकी मौत हो गई। टक्कर लगने के कारण वह हाईवे पर पक्के क्षेत्र में जाकर गिरा था। हाईकोर्ट ने इस पर सुनवाई करते हुए याची की दलीलों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
रिपोर्ट के अनुसार मृतक पक्की रोड पर करीब 8 फुट अंदर था। हाईकोर्ट ने कहा कि उस क्षेत्र में पैदल जाकर हाईवे पार करना एक लापरवाही थी। ऐसे में यदि बाइक सवार को भी लापरवाह माना जाए तो यह दोनों की संयुक्त लापरवाही का मामला बनता है। युवक पक्की सड़क पर था और ऐसे में वह केवल आधे मुआवजे का ही हकदार है। हाईकोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ ही मुआवजा राशि से आधी कटौती के मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल के फैसले पर मुहर लगा दी। हालांकि याची को राहत देते हुए हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल द्वारा मृतक की आंकी गई 1200 रुपये प्रतिमाह की आय को कम मानते हुए इसे 1600 रुपये प्रतिमाह माना। इसके चलते याची को दिए गए 101400 के मुआवजे को बढ़ाकर 2610920 कर दिया।