सियाचिन में 2011 में पोस्ट पर ड्यूटी कर रहे मेजर जीएस चीमा की आसमानी बिजली गिरने से हुई शहादत मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और रक्षा मंत्रालय से पूछा है कि आखिर सरबजीत कौर को क्या-क्या सुविधाएं दी गई हैं। सरबजीत कौर ने याचिका दाखिल कर कहा है कि उनके पति के शव की पहचान नहीं हुई है। उन्होंने सही पहचान और उनके डीएनए टेस्ट की मांग की है।
जालंधर निवासी मेजर चीमा सियाचिन में तैनात थे। एक दिन खराब मौसम के दौरान उनके पोस्ट पर बिजली गिर गई। रिकार्ड के अनुसार इस घटना के चलते उनकी मृत्यु हो गई थी। इस हादसे में शव पूरी तरह से जल गया था। याचिका में बताया गया कि सेना ने उसे उनके पति का जो सामान दिया है, उसमें जो हाथ का कड़ा है वह उनके पति का नहीं है। इसके जवाब में सेना ने हाईकोर्ट को बताया कि इस घटना में शव की पहचान काफी मुश्किल थी।
जिस जगह यह घटना हुई थी, वह जगह बेहद ही सुदूर है, यहां पहुंचना बेहद ही मुश्किल है। सेना के पास ऐसा कोई मैन्युअल नहीं है, जिसके अनुसार याची की मांग को पूरा किया जा सके। सेना ने हाईकोर्ट को बताया कि इसके बावजूद शहीद की विधवा को सभी लाभ जारी कर दिए गए हैं। साथ ही आर्मी स्कूल में उसे नौकरी भी दे दी गई है। हाईकोर्ट ने इस जानकारी के बाद केंद्र सरकार को विधवा को दी जा रही सभी सुविधाओं की जानकारी मांग ली है।