चंडीगढ़ के बढ़ते ट्रैफिक को लेकर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने वीवीआईपी लोगों से सुबह और शाम के व्यस्त ट्रैफिक समय में न निकलने का निवेदन किया। कोर्ट ने कहा कि इससे ट्रैफिक की समस्या का समाधान निकालने में मदद मिलेगी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि चंडीगढ़ सबसे ज्यादा वाहनों वाले शहर में से एक है। यहां पर न केवल चंडीगढ़ का बल्कि साथ ही पंचकूला और मोहाली का ट्रैफिक भी आता है।
सबसे ज्यादा भीड़ का समय सुबह ऑफिस के समय और शाम को ऑफिस से वापस का समय होता है। इस दौरान सड़क पर वाहनों की कतार लग जाती है। इस दौरान यदि कोई वीवीआईपी निकलता है तो उसके कारण ट्रैफिक को रोकना पड़ता है, जिसके चलते जाम बहुत लंबा हो जाता है और ट्रैफिक के सामान्य होने में घंटों लग जाते हैं।
कोर्ट ने कहा कि इससे न केवल ट्रैफिक प्रभावित होता है बल्कि साथ ही लोग अपने काम से लेट हो जाते हैं। कोर्ट ने कहा कि अगर कोई बहुत जरूरी काम न हो तो वीवीआईपी लोग जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाएं और सुबह व शाम को ऑफिस के समय से पहले या उसके बाद ही निकले। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि लोगों को वाहन चलाते हुए नियमों का ध्यान रखना चाहिए।
जस्टिस राजीव शर्मा ने किस्सा साझा करते हुए बताया कि वह जब अपनी कार से हाईकोर्ट के लिए निकले तो एक ऑटो वाले ने अचानक से लेन बदल दी। इसके बाद उन्होंने अपनी कार उसके ऑटो के बराबर लाते हुए उसे समझाया कि इस प्रकार की ड्राइविंग न केवल दूसरों के लिए बल्कि उसके खुद के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
जस्टिस अमोल रतन सिंह ने इस दौरान हाईकोर्ट के बाहर की ओर साइकिल ट्रैक पर वाहनों के खड़े होने की बात कहते हुए वकीलों से निवेदन किया कि वे अपनी कार को साइकिल ट्रैक पर न खड़ा करें। उन्होंने कहा कि वह जानते हैं कि हाईकोर्ट में पार्किंग की समस्या है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वाहनों को साइकिल ट्रैक पर खड़ा करने की अनुमति दे दी जाए। काबिले गौर है कि सुनवाई के दिन ही अमर उजाला ने प्रमुखता से इस खबर को प्रकाशित किया था, जिसके चलते हाईकोर्ट ने वकीलों को यह सलाह दी।