जब इस मामले में याची ने हाईकोर्ट में जमानत की गुहार लगाई तो हाईकोर्ट ने पुलिस जांच को नाकामी का मिसाल बताया। कोर्ट ने कहा कि एक छोटी से चोरी होने के बाद पुलिस एफआईआर दर्ज कर लेती है लेकिन लाखों रुपये के फर्जीवाड़े के इस मामले में पुलिस की जांच हैरान करने वाली है।
इस मामले में वेबसाइट कंपनी कैसे बनी, वेबसाइट कैसे बनी, कंपनी के एक 7वीं पास कर्मचारी के नाम से बैंक में खाता खोला गया और कंपनी की सारा लेनदेन इसी खाते में होता था, पैसे कौन निकालता था। जो मोबाइल नंबर वेबसाइट कंपनी प्रयोग करती थी, उसे कैसे जारी किया गया जबकि जिसके नाम वह सिम कार्ड दिखाया जा रहा है, उस व्यक्ति का कहना है कि उसने सिम खरीदा ही नहीं।
कोर्ट ने कहा कि ऐसे कई विषय है जिनकी जांच हो सकती है। लेकिन पुलिस जांच नहीं करने का मन बना चुकी है। सुनवाई के दौरान याची के वकील ने कोर्ट को बताया था कि उसका नाम एफआईआर में दर्ज नहीं है और मामले में मुख्य आरोपी को गुरुग्राम कोर्ट जमानत दे चुकी है, इसलिए उसे भी जमानत दी जाए। हाईकोर्ट ने अब केस का रिकार्ड और जांच की रिपोर्ट तलब कर ली है।