पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने समय पूर्व सेवानिवृत्ति के आदेश में दखल करने से इन्कार करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में बर्खास्त करने के अलावा कोई सजा नहीं हो सकती। ऐसे मामलों में दिखाई गई कोई भी सहानुभूति अनावश्यक और जनहित के विपरीत होगी।
हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए अमृतसर निवासी राजपाल शर्मा ने बताया कि वह 1991 में पंजाब पुलिस में कांस्टेबल भर्ती हुआ था। इसके बाद 2011 में उसे एएसआई का अस्थायी रैंक दिया गया था। 21 अगस्त को अमृतसर के पुलिस कमिश्नर ने आदेश जारी करते हुए याची समेत 13 पुलिस अधिकारियों को समयपूर्व सेवानिवृत्त करने का आदेश जारी कर दिया।
याची ने कहा कि उसकी 31 साल की सेवा में उसे कोई कारण बताओ नोटिस तक जारी नहीं हुआ। ऐसे में आदेश को रद्द करते हुए याची को सेवा में बनाए रखने का आदेश दिया जाए। याचिका का विरोध करते हुए पंजाब सरकार ने बताया कि याची की 31 साल की सेवा में उस पर 29 बार विभागीय कार्रवाई हुई है। हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस में होने के नाते याची को अनुशासन के उच्चतम मानकों को बनाए रखना चाहिए था जो उसने नहीं किया। ऐसे में उसे सेवा में बनाए रखना जनहित में नहीं है।
सेवा के दौरान इन कारणों से चर्चा का विषय बना था याची
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- पुलिस कमिश्नर कार्यालय में वर्दी के स्थान पर जींस टीशर्ट में पहुंचा था, 28 नवंबर 2014 को मिली थी विभागीय सजा
- हवलदार का असल रैंक होने के बावजूद एएसआई की वर्दी पहनकर लोगों से किया था दुर्व्यवहार, 25 मार्च 2015 को मिली थी सजा
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