हाईकोर्ट ने विचाराधीन अपराधियों को अदालत में पेश करने के दौरान हथकड़ी को लेकर नियमों का पालन सुनिश्चित करने का हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ के अभियोजन निदेशक को आदेश दिया है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के कैदियों को हथकड़ी के साथ पेश करना असांविधानिक है। ऐसे में अभियोजन निदेशक इस बारे में सभी जिलों के अधिकारियों को नियम के बारे में सकुर्लर जारी करें।
याचिका दाखिल करते हुए वर्ल्ड ह्यूमन राइट काउंसिल ने एडवोकेट रंजन लखनपाल के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रेम प्रकाश शुक्ला मामले में हथकड़ियों को लेकर दिशा निर्देश जारी किया था। इनका पालन न होने पर फरीदकोट में कथित गैंगस्टर काला सेखों की 2017 में हुई पेशी के दौरान उन्हें हथकड़ियों के साथ पेश करने से जुड़े समाचार को आधार बनाते हुए अवमानना याचिका दाखिल की गई थी।
याचिका पर पांच साल चली सुनवाई के दौरान अब इस मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी को पकड़ कर पुलिस स्टेशन तक लाते हुए उसके पास खतरनाक हथियार होने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता है लेकिन पुलिस स्टेशन लेकर आ जाने के बाद उसे अदालत में पेश करते हुए हथकड़ी लगाना सही नहीं है। अगर पुलिस को ऐसा लगता है कि यह अनिवार्य है तो इसके लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति लेना जरूरी है।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इस याचिका का निपटारा करते हुए अब इस नियम को सुनिश्चित करने के बारे में हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ के सभी अभियोजन निदेशक को आदेश दिया है। तीनों को सभी जिलों में मौजूद कानून अधिकारियों को इस बारे में सर्कुलर जारी करना होगा।