नाबालिग से दुष्कर्म के बाद उससे विवाह का वादा कर समझौते के आधार पर पॉक्सो एक्ट में दर्ज एफआईआर को रद्द करने से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इन्कार कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि पॉक्सो एक्ट में दर्ज एफआईआर को समझौते के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। याचिका दाखिल करते हुए लुधियाना निवासी एक व्यक्ति ने 23 जुलाई, 2019 को पॉक्सो एक्ट में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की हाईकोर्ट से मांग की थी।
एफआईआर के अनुसार शिकायतकर्ता की नाबालिग बेटी स्कूल का कुछ सामान लेने बाजार गई थी। इस दौरान याचिकाकर्ता ने उससे दुष्कर्म किया। शिकायत के आधार पर पुलिस इस मामले में जांच कर रही है। इसी बीच याची ने बताया कि लड़की की आयु विवाह योग्य हो चुकी है और याची उससे विवाह कर चुका है। दोनों पक्षों के बीच समझौता हो चुका है और ऐसे में इस एफआईआर को रद्द किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने कहा कि पॉक्सो एक्ट बच्चों के बाल यौन शोषण के लिए बना है। अगर इस प्रकार बालिग होने पर विवाह की स्थिति में एफआईआर को रद्द करने की अनुमति दी गई तो एक्ट का ध्येय समाप्त हो जाएगा। हाईकोर्ट ने कहा कि पॉक्सो एक्ट स्पेशल एक्ट है और ऐसे में इसे समझौते के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।