मेवात में 79.20 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है और 20.37 प्रतिशत हिंदू। 7 अगस्त तक 443 निर्माण गिराए गए थे जिससे 354 लोग प्रभावित हुए। प्रभावित लोगों में 71 हिंदू और 281 मुस्लिम थे। ऐसे में आंकड़ें दर्शातें हैं कि कार्रवाई धर्म को देखकर नहीं की गई थी। आंकाड़ों सहित हरियाणा सरकार के तैयार किए गए जवाब को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री में दाखिल करने का आदेश दिया है।
शुक्रवार को नूंह में हुई हिंसा को लेकर लिए गए संज्ञान व इस मामले में दाखिल विभिन्न अर्जियों पर सुनवाई होनी थी। केस सुनवाई के लिए पहुंचा तो न्यायालय के कार्य का समय समाप्त होने को था। इस दौरान हरियाणा के एडिशनल एडवोकेट जनरल ने हाईकोर्ट को बताया कि उनका जवाब तैयार है और इसे रिकॉर्ड पर लिया जाए। हाईकोर्ट ने इसे रिकॉर्ड पर लेने से इनकार करते हुए रजिस्ट्री में दाखिल करने का आदेश दिया। इसके साथ ही लंबित सभी अर्जियों पर भी मुख्य याचिका के साथ ही सुनने का निर्णय लेते हुए केस की सुनवाई स्थगित कर दी।
हरियाणा सरकार ने इस मामले में अपने जवाब में कहा है कि मेवात में मुस्लिम व हिंदूओं की जनसंख्या का अनुपात 80:20 का है। नूंह की पुन्हाना तहसील में 87 प्रतिशत और फिरोजपुर झिरका में 85 प्रतिशत मुस्लिम हैं। निर्माण 70:30 के अनुपात में हटाए गए हैं।
यह था मामला
हाईकोर्ट के जस्टिस जीएस संधावालिया व जस्टिस हरप्रीत कौर जीवन पर आधारित खंडपीठ ने मेवात में हिंसा के बाद निर्माणों को तोड़ने की कार्रवाई पर संज्ञान लेते हुए हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। बेंच ने पूछा था कि क्या तय कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा रही है और साथ ही दो हफ्तों में गिराए निर्माणों का ब्योरा सौंपने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि यह भी सवाल उठता है कि क्या कानून-व्यवस्था की समस्या की आड़ में समुदाय विशेष की इमारतों को तो नहीं गिराया जा रहा है और क्या यह जातीय सफाए की कवायद तो नहीं है।