पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। मंत्रालय ने देश भर में सभी वाहनों के आगे लगे आर्मर्स और बुल बॉर्स को प्रतिबंधित करने के लिए 7 दिसंबर को देश के सभी राज्यों और केंद्र शाषित प्रदेशों को पत्र लिखा था।
चंडीगढ़ निवासी सुनील भसीन ने सीनियर एडवोकेट अनमोल रतन सिंह सिद्धू के जरिये याचिका दाखिल करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की ओर से जारी यह पत्र पूरी तरह से अवैध है। पत्र के जरिये कहा गया है कि जिन भी वाहनों कारों या जीपों पर इस तरह से अलग से गार्ड्स, आर्मर्स या बुल बार्स लगाए गए हैं उनके खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट-1988 की धारा-52 के तहत कार्रवाई की जाए। याचिकाकर्ता के अनुसार इस एक्ट में इस तरह के गार्ड्स, आर्मर्स, या बुल बार्स के बारे में कोई जिक्र तक नहीं किया गया है। बावजूद इसके केंद्र सरकार ने इस एक्ट के तहत इन पर पाबंदी लगा दी है जोकि कानून के तहत पूरी तरह से गलत है।
याचिकाकर्ता के अनुसार केंद्र सरकार के इस फरमान से उन सभी गार्ड्स, आर्मर्स और बुल बार्स के निर्माताओं का व्यवसाय ही चौपट हो जाएगा जो इस या तो इसकी मैन्यूफैक्चरिंग करते हैं या रॉ मैटीरियल तैयार करते हैं याचिका के अनुसार अभी तो कई कार निर्माता कंपनियां भी कारों में यह आर्मर्स और गार्ड्स लगा कर बेच रही हैं। केंद्र सरकार का यह कहना कि वाहनों में लगे यह गार्ड्स बेहद ही घातक हैं पूरी तरह से गलत है । लिहाजा याचिकाकर्ता ने केंद्रीय मंत्रालय द्वारा 7 दिसंबर को जारी इस पत्र को रद्द किया जाए।