पेट्रोल और डीजल पर केंद्र सरकार द्वारा 13 मार्च और फिर 5 मई को को स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी लगाए जाने और पंजाब सरकार द्वारा 15 जून पेट्रोल पर 24.79 और डीजल पर 15.94 वैट बढ़ाए जाने के निर्णय को लेकर जारी नोटिफिकेशन को हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दे दी गई है और पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के तहत लाए जाने की मांग की गई है।
जस्टिस अजय तिवारी एवं जस्टिस जस गुरप्रीत सिंह पूरी की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सहित पंजाब सरकार और पेट्रोलियम कंपनियों को 13 अगस्त के लिए नोटिस जारी जवाब मांग लिया है।
हाईकोर्ट को बताया गया है कि गत वर्ष अप्रैल माह में क्रूड आयल 71 डॉलर प्रति बैरल था जो मार्च 2020 में घट कर 33.36 डॉलर प्रति बैरल हो गया और अप्रैल माह में यह सबसे न्यूनतम 19.90 तो मई में बढ़कर 30 .60 डॉलर प्रति बैरल हो गया। बावजूद इसके केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम करने की बजाय उस पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी लगा दी और फिर पंजाब सरकार ने भी उस पर वैट बढ़ा दिया। जबकि यह तय हुआ था कि इंटरनेशनल मार्केट के आधार पर मूल्य तय होंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जब इंटरनेशनल मार्केट में मूल्य कम हुए तब भी यहां मूल्य कम नहीं किए गए।
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि मूल्य कम करने की बजाय इसे लगातार बढ़ाया जा रहा है। केंद्र ने 13 मार्च और फिर 5 मई को को स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी लगाए जाने और पंजाब सरकार द्वारा 15 जून पेट्रोल पर 24.79 रुपये और डीजल पर 15.94 वैट बढ़ाए जाने के निर्णय को लेकर जारी नोटिफिकेशन जारी कर दी है। याचिकाकर्ता का कहना है कि अगर अभी तक देश में पेट्रोल और डीजल को जीएसटी में शामिल नहीं किया गया है। अगर पेट्रोल और डीजल को जीएसटी में शामिल कर लिया जाये तो कीमतें नियंत्रण में आ जाएंगी और व्यवसायियों और आम लोगों को इसका लाभ मिलेगा।