सुरक्षा के लिए एसएसपी फाजिल्का से गुहार लगाई गई लेकिन उन्होंने भी सुरक्षा मुहैया नहीं करवाई। हाईकोर्ट ने याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि लड़के की आयु शादी के लिए निर्धारित न्यूनतम आयु से कम है लेकिन हाईकोर्ट का काम शादी की वैधता निर्धारित करना नहीं है।
हाईकोर्ट का कार्य संविधानिक अधिकारों की रक्षा करना है। संविधान देश के प्रत्येक नागरिक को जीवन जीने और इसे सम्मान पूर्वक जीने का अधिकार देता है। निर्धारित आयु से पहले शादी करने से यह अधिकार छिन नहीं जाता।
राज्य सरकार की जिम्मेदारी होती है कि प्रत्येक नागरिक के जीवन की रक्षा हो। ऐसे में हाईकोर्ट ने एसएसपी फाजिल्का को आदेश दिए कि वह दोनों पर किसी भी प्रकार के खतरे की समीक्षा करें और यदि उनको किसी भी प्रकार का खतरा है तो उनको उचित सुरक्षा मुहैया करवाई जाए।