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हाईकोर्ट का अहम फैसला: पिता वित्तीय रूप से पुत्र पर निर्भर नहीं तो भी आश्रित, मौत पर उसे मुआवजे का हक

Sun, 26 Nov 2023 11:26 AM IST
ajay kumar विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुनाते हुए कहा कि सूरजभान के पास तीन एकड़ जमीन है और पूर्व सैनिक होने के नाते वह पेंशनभोगी हैं, यह बात सही है। इन दलीलों से स्पष्ट है कि वह आर्थिक रूप से मृतक पर आश्रित नहीं थे लेकिन आश्रित शब्द का अलग-अलग स्थितियों में अलग-अलग अर्थ होता है।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मोटर वाहन हादसे के मुआवजे को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आय का साधन मौजूद होने और बेटे पर आर्थिक रूप से निर्भर न होने वाला पिता भी पुत्र पर आश्रित होता है। आश्रित का अर्थ केवल वित्तीय सहायता के तौर पर नहीं लिया जाना चाहिए बल्कि परिजनों के लिए यह भावनात्मक तौर पर आश्रित, सेवा के लिए आश्रित या शारीरिक निर्भरता के तौर पर भी देखा जाना चाहिए। ऐसे में वित्तीय आश्रित न होने पर भी पिता बेटे की मौत के मुआवजे का हकदार है।

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याचिका दाखिल करते हुए बीमा कंपनी ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल रेवाड़ी के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। ट्रिब्यूनल ने मुआवजे के तौर पर 18 लाख रुपये मृतक की पत्नी, पिता और मां को सौंपने का आदेश दिया था। बीमा कंपनी की दलील थी कि मृतक के पिता सूरज भान एक्स सर्विसमैन हैं और उन्हें पेंशन मिलती है। इसके साथ ही उनके पास तीन एकड़ कृषि योग्य भूमि है और ऐसे में उन्हें मृतक बेटे पर आश्रित नहीं माना जा सकता। 

हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुनाते हुए कहा कि सूरजभान के पास तीन एकड़ जमीन है और पूर्व सैनिक होने के नाते वह पेंशनभोगी हैं, यह बात सही है। इन दलीलों से स्पष्ट है कि वह आर्थिक रूप से मृतक पर आश्रित नहीं थे लेकिन आश्रित शब्द का अलग-अलग स्थितियों में अलग-अलग अर्थ होता है। इस प्रकार मुआवजे का दावा केवल वित्तीय निर्भरता पर हो, यह जरूरी नहीं है। 
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पिता की पुत्र पर सेवा निर्भरता, शारीरिक निर्भरता, भावनात्मक निर्भरता, मनोवैज्ञानिक निर्भरता भी होती है। भले ही मृतक अपने पिता को वित्तीय सहायता प्रदान नहीं कर रहा हो लेकिन फिर भी उसके पिता द्वारा पुत्र पर भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक निर्भरता बनी रहती है। ऐसे में उस पिता को मुआवजा दिया जाना चाहिए, जिसके जवान बेटे की वाहन हादसे में मौत हो गई है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की याचिका को खारिज करते हुए पिता को मुआवजे का पात्र माना है।

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