पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि पति से कभी-कभार लड़ाई या पत्नी द्वारा अभद्र भाषा का इस्तेमाल क्रूरता और तलाक का आधार नहीं है। साथ ही हाईकोर्ट ने पत्नी द्वारा घरेलू हिंसा का केस दर्ज करवाने को भी क्रूरता की श्रेणी के बाहर करार दिया है। याचिका दाखिल करते हुए सिरसा निवासी पति ने बताया कि उसका विवाह फरवरी 2008 में हुआ था।
शादी के बाद से ही पत्नी उससे व उसके घरवालों के साथ बुरा सलूक करने लगी। सार्वजनिक रूप से कई बार उसे बेइज्जत किया गया। इसके बाद भी जब उसे संतोष नहीं हुआ तो वह घर छोड़कर अक्तूबर 2008 में अपने मायके चली गई। इस दौरान उसने घरेलू हिंसा और दहेज से जुड़ा केस भी दर्ज करवाया जिसमें वह निर्दोष साबित हुआ। वहीं पत्नी की ओर से कहा गया कि दहेज की मांग करते हुए विवाह के बाद उसे बहुत परेशान किया गया। बढ़ते अत्याचार के कारण वह अपने मायके लौटने को मजबूर हुई।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैमिली कोर्ट द्वारा तलाक न देने के फैसले को सही मानते हुए याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में लिखा कि कभी कभार लड़ाई वैवाहिक जीवन का हिस्सा है। पत्नी द्वारा पति के खिलाफ केस दर्ज करवाना भी क्रूरता की श्रेणी में नहीं आता है। ऐसे में तलाक के लिए बनाए गए आधार निराधार हैं।