यदि यह आरओबी बनाया गया तो इससे सीधे तौर पर इन उद्योगों का रास्ता बंद हो जाएगा और यहां से बड़े वाहन नहीं निकल पाएंगे। याची ने कहा कि इन उद्योगों के कारण राज्य को राजस्व मिलता है और ऐसे में बीच का हल निकाला जाना चाहिए, जिससे उद्योगों का मार्ग भी न बाधित हो और आरओबी भी बनाया जा सके। याची की दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कोर्ट में मौजूद एडिशनल एडवोकेट जनरल दीपक बाल्यान को याचिका की प्रति सौंपने के आदेश दिए थे।
हाईकोर्ट ने कहा था कि यह मामला तकनीकी है, जिसका हाईकोर्ट के सुनने का कोई मतलब नहीं है। कोर्ट ने कहा था कि हरियाणा सरकार को चाहिए कि याची के साथ मिलकर इसका हल निकाले। कोर्ट ने याचिका को रिप्रेजेंटेशन मानते हुए हरियाणा सरकार को इस रिप्रेजेंटेशन पर याची का पक्ष सुनकर फैसला लेने के आदेश दिए थे।
इस दौरान हरियाणा सरकार ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि था वे इस मामले में सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर निर्णय लेंगे और प्रयास रहेगा कि याची का हित प्रभावित न हो। इसके बावजूद न तो रिप्रेजेंटेशन पर फैसला लिया गया और न ही आदेश का पालन किया गया। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि अधिकारी हमारे आदेश को इतना हल्के में लेते हैं क्या।
हरियाणा सरकार की ओर से दीपक बाल्यान ने हाईकोर्ट से दो सप्ताह की मोहलत मांगी, जिसे नामंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने आदेश का पालन करने के लिए सोमवार तक की मोहलत दी। इसके साथ ही यह स्पष्ट कर दिया कि आदेश का पालन नहीं हुआ तो स्थानीय निकाय विभाग के प्रधान सचिव को जेल भेजने के आदेश जारी कर दिए जाएंगे।