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पंजाब आप ने बैंस बंधुओं पर लगाया पार्टी तोड़ने का आरोप, नंबर गेम में जुटे सुखपाल खैरा

Sun, 29 Jul 2018 11:09 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सुखपाल सिंह खैरा - फोटो : फाइल फोटो
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विधायक सुखपाल सिंह खैरा के विरोधी तेवरों के कारण पंजाब आप में मचे घमासान के बीच प्रदेश नेतृत्व ने लोक इंसाफ पार्टी के बैंस बंधुओं पर आरोप लगाया है कि वे आम आदमी पार्टी को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उधर, आप आलाकमान ने खैरा के विरोध पर ठीक उसी तरह चुप्पी साध ली है, जैसे दिल्ली और पंजाब में  कई नेताओं को पार्टी से निकालने के बाद होने वाली बयानबाजी पर वह साधती रही है। 
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इधर, आठ विधायकों के साथ अपनी ताकत दिखा रहे सुखपाल खैरा आप के दो-तिहाई विधायकों को अपने साथ लाने की नंबरगेम में उलझ गए हैं। खैरा ने शुक्रवार को प्रेस कांफ्रें स में आठ विधायकों को लेकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया था। उन्होंने कुछ और विधायकों के साथ आने का दावा भी किया लेकिन पार्टी की प्रदेश इकाई के नेताओं का कहना है कि 2 अगस्त को खैरा द्वारा बुलाई कनवेंशन में उनके दावे खोखले साबित हो जाएंगे, क्योंकि इन आठ विधायकों में से कई पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं। इस बीच, खैरा को आप से बगावत करके अलग दल बनाने के लिए कम से कम छह विधायकों की और जरूरत होगी। 
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आप
तो फिर नेता प्रतिपक्ष बन सकते हैं खैरा
संभावनाओं को आंकड़ों में मापा जाए तो पंजाब विधानसभा में आप विधायकों की कुल संख्या 20 है और लोक इंसाफ पार्टी के 2 विधायक अब उनके साथ नहीं हैं।  खैरा अगर छह और विधायकों को अपने साथ जोड़ लेते हैं तो आप विधायक दल के विघटन को मंजूरी मिल जाएगी और 14 विधायकों के साथ खैरा किसी दूसरी पार्टी के साथ जुड़ सकते हैं। खैरा को बैंस बंधुओं की पार्टी का समर्थन पहले से है और सदन में इस पार्टी की विधायक संख्या 17 हो जाएगी। दूसरी ओर अकाली-भाजपा गठबंधन की कुल विधायकों की संख्या 17 (14 शिअद और तीन भाजपा) है। लेकिन कुल 15 विधायकों की नई पार्टी के तौर पर खैरा अकाली दल से आगे रहेंगे और नेता प्रतिपक्ष का पद उनके हिस्से में फिर आ सकता है। 

खैरा के मनाने के मूड में नहीं आप हाईकमान
नेता प्रतिपक्ष के पद से हटाने के बाद सुखपाल खैरा के पार्टी में फूट डालने वाले तेवरों के बावजूद आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल किसी मान-मनव्वल के मूड में नहीं हैं। दरअसल खैरा और केजरीवाल के बीच रिश्ते उसी समय तल्ख हो गए थे जब केजरीवाल द्वारा विक्रम सिंह मजीठिया से मानहानि केस में माफी मांगी गई थी। खैरा ने कड़ा विरोध करते हुए विधायकों के साथ कई बैठकें की थीं। उन्होंने दिल्ली जाकर केजरीवाल से मिलने से भी इंकार कर दिया। इसके अलावा पार्टी को उस समय काफी आलोचना झेलनी पड़ी जब खैरा ने खालिस्तानी रेफरेंडम-2020 का खुला समर्थन किया।

क्या है दलबदल कानून
संविधान के अनुसार, दलबदल की स्थिति तब होती है जब किसी भी दल के सांसद या विधायक अपनी मर्जी से पार्टी छोड़ते हैं या पार्टी व्हिप की अवहेलना करते हैं। इस स्थिति में उनकी सदस्यता को समाप्त किया जा सकता है और उन पर दलबदल निरोधक कानून लागू होगा। लेकिन यदि किसी पार्टी के एक साथ दो तिहाई सांसद या विधायक (पहले ये संख्या एक तिहाई थी) पार्टी छोड़ते हैं तो उन पर ये कानून लागू नहीं होगा। हालांकि उन्हें अपना स्वतंत्र दल बनाने की अनुमति नहीं है। वह किसी दूसरे दल में शामिल हो सकते हैं।
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