पंजाब सरकार ने अब ऐसे किसानों पर सख्ती शुरू कर दी है जो धान की पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। प्रदेश में 2019 में बनाए नियम के तहत राजस्व रिकार्ड में ऐसे किसानों की रेड-एंट्री की जा रही है। फिलहाल 35 किसानों के खिलाफ रेड-एंट्री करने की जानकारी संबंधित विभाग से मिली है।
वहीं पराली जलाने पर अब तक 696 केस दर्ज किए जा चुके हैं। दूसरी ओर किसानों ने रेड-एंट्री का सख्त विरोध भी शुरू कर दिया है। कांग्रेस, अकाली दल और किसान संगठनों ने सरकार के इस कदम को गलत ठहराते हुए पराली प्रबंधन के लिए किसानों को मुआवजा देने की मांग की है।
पराली जलाने के ज्यादातर केस माझा क्षेत्र में दर्ज हुए हैं, जिनमें अमृतसर जिला सबसे आगे है। राज्य सरकार ने इसके खिलाफ जागरूकता मुहिम के साथ-साथ किसानों को पराली प्रबंधन के लिए मशीनरी उपलब्ध कराने का काम शुरू किया है। इसके बावजूद सीमावर्ती जिलों में किसानों की ओर से धान की पराली जलाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
इसे रोकने के लिए राजस्व विभाग ने जिन किसानों के राजस्व रिकॉर्ड में रेड-एंट्री की है, उनके लिए कई समस्याएं खड़ी होने वाली हैं। एक बार रेड-एंट्री हो जाने के बाद संबंधित किसान अपनी भूमि पर न तो कर्ज ले सकता है, न ही उसे गिरवी रख सकता है और न ही उसे बेच सकता है। राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि पराली जलाने के जो 696 केस दर्ज किए गए हैं, उन मामलों की भी जांच की जा रही है।
अगर ये सही पाए गए तो संबंधित किसानों के राजस्व रिकार्ड में रेड-एंट्री की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को धान की पराली जलाने से रोकने के लिए सभी तरीके आजमा रही है। किसानों को पराली प्रबंधन के लिए हर तरह की तकनीकी मदद मुहैया कराई जा रही है। फिर भी किसान नहीं रुके तो कार्रवाई करेंगे।
राजस्व विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पराली प्रबंधन के लिए राज्य सरकार इस सीजन में 32100 मशीनें सब्सिडी पर मुहैया का रही है, जिनसे पराली को बिना जलाए मिट्टी में ही मिश्रित किया जा सकता है। इस काम के लिए केंद्र सरकार ने भी 245 करोड़ रुपये जारी किए हैं।
सरकार ने सितंबर में जारी किए आदेश
राजस्व विभाग के अनुसार सरकार ने 15 सितंबर को सभी जिला उपायुक्तों को पत्र जारी कर आदेश दिए हैं कि वह अपने क्षेत्रों में पराली जलाने वाले किसानों के राजस्व रिकार्ड में रेड-एंट्री करें। इसके बाद से जिला उपायुक्तों की ओर से यह काम शुरू कर दिया गया है। फिलहाल जिला उपायुक्तों की ओर से राजस्व विभाग को यह सूची मुहैया नहीं कराई गई है कि अब तक कितने किसानों के राजस्व रिकार्ड पर रेड-एंट्री कर दी गई है। दूसरी ओर पंजाब राज्य रिमोट सेंसिंग ने 15 सितंबर से ही राज्य में खेतों में पराली जलाने जाने की निगरानी शुरू कर दी है।