पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चिलानंद सरस्वती ने कहा कि हमारे संत प्रजातंत्र और शासन तंत्र के अधीन हो चुके हैं। उन्हें धर्म की स्थापना करने की बजाय प्रचारक बना दिया गया है। इसी कारण आज हिंदू समाज पूरी तरह से दिशा विहीन और चेतना विहीन हो गया है।
सरकारों ने हमारे धार्मिक स्थलों को अपने अधीन कर लिया है। जिन्हें स्वतंत्र करवाना अनिवार्य हो चुका है। आज के शासनतंत्र के संचालक व्यास पीठ को मानने को ही तैयार नहीं और वे हमारे पास आने से परहेज करते हैं। शंकराचार्य सोमवार को पत्रकारों से बात कर रहे थे।
इस दौरान उन्होंने कहा कि जवाहर लाल नेहरू ने अपने तरीके से संतों को चलाने की जो रीत शुरू की थी उसे आज तक ढोया जा रहा है। इसी कारण संत धर्म की मर्यादाओं को भूल राजनेताओं के हाथों की कठपुतलियां बन कर रह गए हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू के चेतना विहीन होने के पीछे हमारे ही समाज के राजीतिक पार्टियों से जुड़े लोगों का सबसे बड़ा हाथ है। कोई भी राजनीतिक दल सत्ता संभाले, सभी अपना घर भरने का प्रयास पहले करते हैं। यही भ्रष्टाचार का मुख्य कारण है।
मोदी स्वच्छ छवि के व्यक्ति
अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार पहले भी रही है और अटल जी के समय में बढ़िया काम हुए हैं। उस समय अटल जी पार्टी के नाम से जाने जाते थे, आज स्थिति कुछ विपरीत है। भाजपा मोदी के चेहरे को आगे रखकर जीती है। मोदी एक स्वच्छ छवि का व्यक्तित्व रखते हैं। उन्होंने खुद को कभी भी हिंदुत्व को प्रमुख रखकर पेश नहीं किया। उन्होंने विकास की बात की, मगर मुस्लिम टोपी पहनने से इंकार करने से लगता है कि उनके अंदर हिंदुत्व की भावना का भी संचार है, जो एक अच्छा संकेत है।
भ्रष्टाचार को सुधारने में वक्त तो लगेगा
उन्होंने कहा कि पहले जो सरकार केंद्र में रही, उसने प्रशासनिक स्तर पर इतना भ्रष्टाचार कर रखा है कि उस कचरे को साफ करने में थोड़ा समय तो लगेगा ही। ऐसे में मोदी से यह अपेक्षा करना कि वह चुटकी बजाते ही सब ठीक कर देंगे, गलत होगा। सरकार और मोदी को थोड़ा समय दिया जाना चाहिए।
स्वच्छ प्रशासन की सफलता के लिए नीयत, नीति, उसे क्रियान्वित करने का तरीका और क्रियान्वित करने वाला व्यक्ति अगर सही हो तो व्यवस्था दुरुस्त होने में समय नहीं लगता। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों में चेतना की बेहद कमी है। इस अवसर पर जेके पासी, संदीप नागौरी, डॉ. बिंदूसार शुक्ला, भारत भूषण वर्मा, अश्विनी गैंद, अरविंद सूद, प्रेमनाथ जोशी, डॉ. रणजीत सिंह, अशोक पुरी और रमेश भारद्वाज मौजूद थे।