पंजाब विश्वविद्यालय यूजीसी की गाइडलाइन के मुताबिक ही काम करेगा। मतलब फाइनल ईयर की परीक्षाएं करवाई जाएंगी। इसके लिए विस्तृत प्लान तैयार किया जाएगा। सितंबर माह के आखिर में यह परीक्षाएं होंगी। इसे पीयू आगे-पीछे भी कर सकता है। साथ ही परीक्षा की अवधि डेढ़ से दो घंटे की हो सकती है। परीक्षा केंद्र कहां-कहां बनेंगे, यह तय करने के लिए पीयू प्रशासन बैठकें कर रहा है।
जानकारी के अनुसार यूजीसी ने पहली गाइडलाइन जारी की थी कि विश्वविद्यालय अपने स्तर से परीक्षाएं कराने व न कराने पर निर्णय ले सकते हैं। पंजाब विश्वविद्यालय ने परीक्षा कराने की योजना बनाई लेकिन फिर पंजाब सरकार के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में यह तय हो गया कि छात्रों को प्रमोट किया जाएगा। बिना परीक्षा के पीयू छात्रों को प्रमोट नहीं करना चाहता था। वह चाहता है कि छात्रों की परीक्षाएं हों।
वहीं दूसरी ओर छात्र भी पीयू पर दबाव डाल रहे थे कि परीक्षाएं किसी हाल में नहीं कराई जाएं। इस बीच अमर उजाला ने 17 जून को साफ कर दिया था कि पंजाब विश्वविद्यालय फाइनल ईयर की परीक्षाएं हर हाल में कराएगा क्योंकि फाइनल ईयर की डिग्री छात्र के भविष्य में काम आती है। बिना एग्जाम के प्रमोट करने से उन्हें नौकरी आदि में दिक्कत आएगी। इसी को ध्यान में रखकर पीयू ने परीक्षा कराने की सोची।
हाल ही में फिर पंजाब सरकार ने कॉलेज व विश्वविद्यालयों के छात्रों को बिना एग्जाम के प्रमोट करने की घोषणा कर दी। इससे पीयू को झटका लगा। पीयू ने इस घोषणा को दरकिनार नहीं किया लेकिन उन्होंने कहा कि यूजीसी की गाइडलाइन भी आ रही है और उसे भी देखा जाएगा। अब पीयू को गाइडलाइन मिल गई है और वह परीक्षा आयोजित करने की तैयारी में जुट गया है।