पंजाब विश्वविद्यालय ने उन छात्रों को मौका दिया है जो परीक्षा शुल्क जमा नहीं कर पाए थे। ऐसे छात्रों की संख्या गिनती की ही है, लेकिन नोटिस निकाल दिया गया है। छात्रों ने इस नोटिस के बाद पीयू के प्रति अपना गुस्सा जाहिर किया है। उन्होंने कहा है कि पहले पीयू यह बताए कि एग्जाम करवाएगा या नहीं। यदि एग्जाम होंगे तो विद्यार्थी उसी के अनुरूप अपनी तैयारी करेंगे। पहले पीयू की ओर से परीक्षाएं न करवाने को लेकर निर्णय लिया गया था।
पीयू ने 15 दिन पहले एक ऑनलाइन बैठक पंजाब सरकार के अधिकारियों के साथ की थी। उस बैठक से बात सामने निकलकर आई। कहा गया था कि पहले व दूसरे साल के विद्यार्थियों की परीक्षाएं न ली जाएं। तीसरे साल के विद्यार्थियों को परीक्षा में बैठाने की योजना बनाई जाए। बैैठक खत्म होने के बाद यह मामला सार्वजनिक हुआ। कुछ विद्यार्थियों को सुकून मिला तो कुछ को नहीं, क्योंकि पीयू की ओर से पढ़ाई नहीं करवाई जा रही थी। कोर्स भी पूरा नहीं हो पाया था।
हालांकि अब ऑनलाइन पढ़ाई करवाई जा रही है। उसके बाद पीयू ने कई अन्य बैठकें और कीं। उसमें बात निकलकर आई कि पीयू परीक्षाएं करवाएगा। उसका खाका तैयार किया जा रहा है। पीयू केवल लॉकडाउन खुलने का इंतजार कर रहा है। यह बात विद्यार्थियों को पता लगी तो फिर वह तनाव में आ गए। आखिर वह समझ नहीं पा रहे हैं कि एग्जाम होगा या नहीं। वह कोर्स की पढ़ाई करें या नहीं।
वीरवार को पीयू की ओर से लेट फीस जमा करने का नोटिस निकाला गया। इसमें कहा गया कि स्नातक व परास्नातक के जिन विद्यार्थियों ने फीस जमा नहीं की थी तो वह कर सकते हैं। लेट फीस जमा करने की तीन तिथियां दी गई हैं। जो जितने दिन बाद फीस जमा करेगा उतना ही लेट शुल्क लगेगा। यह बात छात्रों को भी पता लगी। एनएसयूआई अध्यक्ष निखिल नरमेटा, आयुष कुमार, विजय कुमार आदि का कहना है कि पीयू लेट शुल्क की मांग कर रहा है, लेकिन यह बताने को तैयार नहीं है कि परीक्षाएं होंगी या नहीं।
पीयू को अपनी पॉलिसी को साफ करना चाहिए ताकि विद्यार्थियों का तनाव दूर हो सके। यदि एग्जाम होंगे तो विद्यार्थी परीक्षाओं की तैयारी करें अन्यथा वह अगले सेमेस्टर की पढ़ाई की योजना बनाएं। निखिल का कहना है कि लाखों विद्यार्थी असमंजस में हैं। वह समझ नहीं पा रहे हैं कि पीयू क्या चाहता है। यदि परीक्षाएं नहीं करवाई जाएं तो फीस वापस की जाए या अगले सेमेस्टर में जोड़ी जाए।