पीयू के शिक्षकों ने संकल्प लिया है कि जब तक लॉकडाउन है तब तक वह घरों में ही रहेंगे। सभी कार्य घर बैठकर करेंगे। अधिक जरूरी काम होने पर ही परिवार का एक सदस्य निकलेगा, लेकिन वह भी पूरी तरह सुरक्षित होकर। बाद में सैनिटाइज व अन्य से सुरक्षित होकर ही उसे घर में प्रवेश दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कर्मचारी भी लॉकडाउन का पूरी तरह पालन कर रहे हैं। साथ ही कर्मचारी नेता भी अच्छी भूमिका निभा रहे हैं।
सोमवार को लॉकडाउन था। इसकी सूचना पीयू के शिक्षक, कर्मचारियों को एक दिन पहले लग गई तो उन्होंने अपने अपने परिवार से बाहर न निकलने को कहा और वह खुद भी बाहर नहीं निकले। दूध, आटा, चावल, दाल आदि सामान जिन घरों में खत्म हुआ तो वही लेने के लिए परिवार के एक-दो सदस्य निकले। बच्चों को किसी हाल में बाहर नहीं निकलने दिया। परिवार के लोग गेम खेलकर, टीवी देखकर और मूवी देखकर अपना समय पास कर रहे हैं। कई शिक्षक अपने बच्चों को नियमित अखबार पढ़ने की आदत डाल रहे हैं। कुछ लोग घरों में सफाई करवाने में जुटे हैं तो कुछ रोज रसोईघर में खाना पकवाने में मदद कर रहे हैं।
जरूरी है सुरक्षा, घरों पर ही रहें
कोरोना वायरस की चपेट में पूरी दुनिया है। भारत में भी यह वायरस पैर पसार रहा है। पीयू के लोगों के अलावा बाहर के लोगों से भी अपील है कि वह घर में रही रहें। अपनी सुरक्षा और परिवार की सुरक्षा करें।
- प्रो. नवदीप गोयल, सीनेटर
संकल्प, संयम और सावधानी बरतें.. कोरोना से जीवन को बचाएं
पंजाब यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. राजकुमार ने कहा कि संकल्प, संयम और सावधानी से किसी भी आपदा या विपदा को दूर किया जा सकता है। अगर हम इन तीनों का पालन करते हैं तो कोरोना से अपने अमूल्य जीवन को बचा सकते हैं। आज हमें आत्म अनुशासित होकर, सभी मानव जाति की भलाई एवं कल्याण के लिए सोचने की आवश्यकता है। जानकारी और जिम्मेदारी से ही इस संकट की घड़ी का प्रतिकार संभव है। इसी दिशा में कारगर कदम उठाने होंगे।
उन्होंने कहा कि पीयू परिवार अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। उन्होंने शिक्षकों, कर्मचारियों से भी अपील की कि वह केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन करें और अपनी सुरक्षा करते रहें। जीवन अमूल्य है, इसे बचाना होगा।
यदि सभी लोग कुछ दिन तक अपने घरों में परिवार को समय देंगे तो परिवार को भी अच्छा लगेगा और तब तक कोरोना भी विदा हो जाएगा। हर व्यक्ति का घर में रहना बहुत जरूरी है। आइए हम धैर्य, ध्यान व धीरज के मूल मंत्रों को अपनाते हुए हम सब मिलकर कोरोना को हराएं और मानवता का परचम लहराएं।
शिक्षक घरों से ही रिसर्च प्रोजेक्टों को दे रहे हैं गति
कोरोना के कारण पीयू के शिक्षक अपने रिसर्च प्रोजेक्टों को घरों पर रहकर ही गति प्रदान कर रहे हैं। 250 से अधिक शिक्षक इस कार्य में लगे हैं। उन्होंने रिसर्च से जुड़े संसाधन घरों में उपलब्ध करा लिए हैं। वह इसलिए ऐसा कर रहे हैं कि एक तो कोरोना से बचाव होगा और दूसरा रिसर्च प्रोजेक्ट समय से पूरे हो जाएंगे।
पीयू में 150 से अधिक शिक्षक रिसर्च में लगे हैं। यह रिसर्च कुछ पीयू के फंड के हैं तो कुछ केंद्र सरकार के फंड के। ये शोध काफी महत्वपूर्ण हैं, इसलिए यह प्रभावित नहीं किए जा सकते। इसी को ध्यान में रखते हुए शिक्षक अपने घरों पर कार्य कर रहे हैं। आवाजाही शुरू होने के बाद फाइंडिंग आदि का कार्य होगा।
इनके अलावा पीएचडी कर रहे 300 से अधिक विद्यार्थी भी अपने घरों पर काम में जुटे हैं। शिक्षकों व स्कॉलर्स का कहना है कि घर में समय निकालकर वह रिसर्च को जारी रख रहे हैं ताकि समय पर उन्हें पूरा कर सकें। सर्वाधिक रिसर्च प्रोजेक्ट साइंस के शिक्षकों के पास हैं। कुछ पूरे होने वाले हैं तो कुछ पर काम चल रहा है।
पीयू के छात्रों ने हॉस्टल को ही बनाया लाइब्रेरी
पंजाब यूनिवर्सिटी में कोरोना वायरस से बचाव के चलते ज्यादातर विद्यार्थी घर चले गए हैं। दूरदराज के राज्यों के विद्यार्थी अभी भी हॉस्टल में रुके हुए हैं। सोमवार को इन विद्यार्थियों से उनकी दिनचर्या पर बातचीत की गई। इस दौरान छात्रों ने बताया हर हॉस्टल में अधिकतम 25 विद्यार्थी रह रहे हैं। किसी किसी हॉस्टल में यह संख्या 10 भी है। ऐसे में एकांत होने के कारण प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी अच्छे से हो रही है।
यूआईईटी के छात्र बिहार निवासी सत्यम ने बताया कि सफर में कोरोना वायरस के खतरे के चलते वह घर नहीं गए। उन्हें हॉस्टल में रहना ज्यादा उचित लगा। उन्होंने बताया हॉस्टल के अन्य विद्यार्थियों के घर जाने के बाद हॉस्टल में शांति का माहौल बना हुआ है। पीयू में लाइब्रेरी भी बंद कर दी गई है।
इसके बाद से उन्होंने अपने कमरे को ही लाइब्रेरी बना लिया है। सुबह से लेकर रात तक वह कमरे में ही यूपीएसई की अपनी तैयारियों में लगे हैं। पीयू में चाय-कॉफी की दुकानें बंद होने के कारण थोड़ी समस्या आ रही है, क्योंकि उन्हें हॉस्टल में कुकिंग की अनुमति नहीं है। सिर्फ मेस में ही तीन टाइम का खाना मिल रहा है। उसके लिए भी उन्हें दूसरे हॉस्टल की मेस में जाना पड़ता है।
वहीं एक छात्र अभिषेक ने बताया कि हॉस्टल में कम बच्चे होने के कारण वाईफाई अब अच्छी स्पीड में चल रहा है। स्टूडेंट्स खाली समय में ऑनलाइन गेम्स और फिल्में देखकर अपना समय व्यतीत कर रहे हैं। स्टूडेंट्स के हॉस्टल से बाहर निकलने और आउटडोर खेलों पर पूरी तरह से पाबंदी लगी हुई है। इस कारण उन्हें अपने कमरों में ही टाइम पास करना पड़ रहा है।