पीयू में मंगलवार को आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान कुलपति प्रो. रेणु विग ने बताया कि पूर्व छात्र सम्मेलन से मिलने वाले फंड से वह समग्र निधि (कॉर्पस फंड) की स्थापना करेंगे। इससे पीयू की आय में स्थिरता आएगी। दरअसल पंजाब सरकार की ओर से निर्धारित अनुदान राशि नहीं दी जा रही है, जिससे पीयू बजट की समस्या से जूझ रही है।
पीयू को 60 प्रतिशत अनुदान केंद्र और 40 प्रतिशत अनुदान पंजाब सरकार से मिलता है लेकिन इसके विपरीत प्रो. रेणु ने बताया पंजाब 40 में से केवल 10 प्रतिशत अनुदान की राशि दे रहा है। पीयू को 90 प्रतिशत अनुदान केंद्र और 10 प्रतिशत पंजाब सरकार दे रही है। इसके अलावा पीयू के खुद के भी राजस्व के स्रोत है। अक्तूबर माह में बोर्ड ऑफ फाइनेंस की बैठक के मिनट्स के अनुसार पंजाब सरकार के पिछले वर्षों की 450 करोड़ अनुदान राशि बकाया रहती है।
संशोधित वेतनमान लागू होने से बढ़ा खर्च
जनवरी 2023 में संशोधित वेतनमान लागू होने से पीयू के वेतन, पेंशन और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभ के कारण खर्च बढ़ा है। इसपर पीयू ने केंद्र और पंजाब सरकार दोनों को वार्षिक वेतन अनुदान में बढ़ोतरी करने की मांग की थी। पंजाब ने अनुदान राशि बढ़ाने पर सहमति जताई लेकिन इस शर्त के साथ कि पहले केंद्र वार्षिक अनुदान राशि बढ़ाए। 2023-24 में पीयू का अनुमानित बजट 752.23 करोड़ है। सत्र 2022-23 में पीयू का बजट 635.72 करोड़ रहा। कुल बजट में से 80 प्रतिशत खर्च 1378 शिक्षण कर्मचारी और अन्य कर्मचारियों के वेतनमान पर होता है। पीयू पूर्व विद्यार्थियों से हॉस्टल बनाने, विरासत इमारतों के संरक्षण और सोलर प्लांट के लिए फंड की अपील कर रही है। इसके अलावा उनसे सीएसआर के तहत सहयोग के लिए भी कहा है। पीयू एलुमनी एसोसिएशन पर इन चार प्रोजेक्ट पर फंडिंग के लिए जानकारी दी गई है।