चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय ने तीन साल में यूसोल के पंजाबी के शिक्षक डॉ. पाली भूपिंदर को यह नहीं बताया कि उनकी पदोन्नति रुकने का मुख्य कारण क्या है। उन्होंने इसके लिए कई ई-मेल किए और आरटीआई भी डाली, तब भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला। अब पीयू चोरों ओर से घिरी तो उन्होंने बयान जारी किया कि डॉ. पाली भूपिंदर के अभिलेख अपूर्ण हैं।
तीन साल पहले फिल्म निर्देशक डॉ. भूपिंदर पाली की पदोन्नति असिस्टेंट प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर हो जानी चाहिए थी। साक्षात्कार आदि हो गए, लेकिन पदोन्नति के आदेश जारी नहीं किए। डॉ. भूपिंदर का आरोप है कि पीयू ने कभी नहीं बताया कि उसके अभिलेख अपूर्ण हैं। केवल इतना जरूर कहा कि वह नए सिरे से पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू करें। मैंने फिर पूछा था कि नए सिरे से प्रक्रिया शुरू क्यों कर रहे हैं। इस बात का जवाब तीन साल में नहीं दिया। अब पंजाब में चुनाव आ रहे हैं तो लोग इनसे जवाब मांग रहे हैं। अब तीन साल में पदोन्नति न करने के कारण सामने ला रहे हैं।
पीयू का तर्क : अतिरिक्त दस्तावेज जमा कराते तो हो जाती पदोन्नति
पीयू ने कहा है कि डॉ. पाली भूपिंदर को जुलाई 2018 में स्टेज 3 से स्टेज 4 में पदोन्नत किया जाना था। चयन समिति ने उनके अकादमिक प्रदर्शन संकेतक (एपीआई) स्कोर में विसंगति पाई। उसके आधार पर उन्हें एपीआई स्कोर की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए यूसोल विभाग को अतिरिक्त दस्तावेज/प्रशंसापत्र जमा करने के लिए कहा गया था। यूसोल विभाग को भी इस प्रकरण की फिर से जांच करने के लिए सूचित किया गया था। जांच में पाया गया है कि आज तक डॉ. पाली भूपिंदर की ओर से यूसोल विभाग में कोई अतिरिक्त दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए, जिसके चलते उनकी पदोन्नति की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जा सका।