पीयू सीनेट की बैठक में वीरवार को कई सदस्यों ने इशारा किया कि ऐसा ही बवाल आगे सीनेट में होता रहा तो उसके बाद नियमों में बदलाव होगा। गवर्निंग रिफॉर्म के अलावा स्ट्रैक्चरल रिफार्म होगा। पीयू सीनेट में पहली बार पहुंचे सदस्यों ने दिल्ली तक मामला पहुंचा दिया है। उन्होेंने कहा है कि पीयू को आगे ले जाना है तो दिल्ली का दखल जरूरी है। पीयू की सिंडिकेट व सीनेट राजनीतिक अड्डा आगे न बने, इसके लिए कदम उठाए जाएंगे।
सीनेट सदस्य संजय टंडन ने कहा कि वीसी यहां सर्वोच्च अधिकारी होते हैं, लेकिन वीरवार को जिस तरह उनकी तरफ सदस्यों ने उंगली उठाई है, उनकी टेबल घेरने की कोशिश की है, वह ठीक नहीं है। यह शर्मिंदगी की बात है। उन्होंने कहा कि समय की जरूरत के हिसाब से स्ट्रैक्चर रिफार्म होता है, जो कोई बुरी बात नहीं है। यह धमकी नहीं है यह पीयू के लिए जरूरत है। इसी दौरान सीनेटर सीकरी ने कहा कि अनुच्छेद 370 तोड़ दी है तो सीनेट तोड़ने की तैयारी की जा रही है।
अनुच्छेद 370 जम्मू से हटाया गया था, यह पंजाब है। यह बोलते ही दूसरे ग्रुप ने विरोध दर्ज कराया। कहा कि किसी ने ऐसा नहीं कहा है। उसके बाद सीनेटर सीकरी ने माफी मांगी। डॉ. सुभाष शर्मा ने कहा, पीयू के लिए गवर्निंग रिफार्म की जरूरत है। एक ही ग्रुप अपनी मनमानी पर उतारू है। इसी बीच अशोक गोयल ने भी पीयू कैलेंडर में लिखे नियम पढ़े। विरोध हुआ तो अशोक गोयल ने वीसी से कहा, यह गुंडाराज नहीं चलेगा। इस पर विक्की गिल ने एतराज जताया।
कहा कि भाषा का सही प्रयोग किया जाए। साथ ही पूर्व डीएसडब्ल्यू के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की। कहा कि बड़े स्तर पर घोटाले हुए हैं। केंद्रीय मंत्री सोमप्रकाश ने कहा, पीयू शिक्षा का मंदिर है। इसे राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। रैंकिंग पर ध्यान देना चाहिए। प्राइवेट विश्वविद्यालय अच्छे चल रहे हैं। पीयू को किस तरह आगे ले जाना है, यह ध्यान देने की जरूरत है। डिस्कस में राजनीति नहीं आनी चाहिए। ऐसे ही यहां सीनेट में लड़ते रहे तो पीयू आगे नहीं जा पाएगा।
कहा, देश हित के अनुच्छेद 370 को हटाया गया और आगे भी सुधार हर क्षेत्र में होंगे। सांसद किरण खेर, सीनेटर अनु चतरथ, पूर्व मंत्री पवन बंसल, सत्यपाल जैन, डीपीएस रंधावा समेत कई ने अपनी बात रखी। इस दौरान सांसद किरण खेर को अगले प्रस्ताव पर वीसी ने बोलने का मौका दिया तो इसका दूसरे ग्रुप ने विरोध किया। कहा, चल रहे प्रस्ताव पर निर्णय लिया जाए। सांसद किरण खेर को कहीं जाना था, इसलिए वह अपनी बात रखना चाहती थीं।
प्रो. गुरमीत ने सीनेट को दिखाया आईना
लगातार बवाल बढ़ रहा था तो इसी बीच हिंदी विभाग अध्यक्ष प्रो. गुरमीत सिंह खड़े हुए। उन्होंने कहा, आज सीनेट में जितनी स्ट्रैंथ है उतनी कभी नहीं रही। आगे भी ऐसे ही रहे तो अच्छा होगा। कहा, सीनेट में पांच सदस्य नए आए हैं। ऐसे में यहां का हंगामा उनके सामने पीयू की क्या छवि प्रस्तुत करेगा। सीनेट पर सवाल न खड़े करें। उन्होंने कहा, प्रो. नाहर को डीएसडब्ल्यू बनाने पर इतना जोर दिया जा रहा है। मैं कहता हूं, प्रो. नाहर को खुद ही इस मामले से हट जाना चाहिए।
प्रो. नाहर केवल मोहरा है, उनका इस्तेमाल किया जा रहा है। कहा, आज यहां मंत्री आए हैं, हमें उनका लाभ उठाना चाहिए था। पीयू के मुद्दे उनके सामने रखने चाहिए थे। सातवें वेतनमान की मांग रखनी चाहिए थी। सेंट्रल यूनिवर्सिटी पीयू को बनाने पर बात होनी चाहिए थी। कहा, पीयू को आगे ले जाना है तो सभी को साथ मिलकर चलना होगा। प्रो. गुरमीत सिंह की इस बात के बाद सभी लोग शांत हो गए और उसके बाद सीनेट के डैकोरम का पालन किया गया। प्रो. अजय रंगा ने भी विचार रखे।