फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पीयू के सबसे ओल्ड एलुमनी डॉ. सत्यव्रत शास्त्री ने थाईलैंड की महारानी को सिखाई थी संस्कृत

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। पीयू से एक से बढ़कर एक स्टूडेंट्स निकले, जिनका डंका देश ही नहीं विदेशों में भी बज रहा है। उन्हीं में शामिल हैं संस्कृत के प्रख्यात विद्वान एवं पद्मभूषण अवार्ड से सम्मानित डॉ. सत्यव्रत शास्त्री। वह अकेले ऐसे शख्स हैं जिन्होंने थाईलैंड की महारानी को संस्कृत सिखाई और संस्कृत में ही बीए व एमए की डिग्री दिलाई। यही नहीं थाईलैंड समेत कई देशों में उन्होंने संस्कृत के अभिलेख ढूंढे। अब वह रामा स्टोरी साउथ एशिया प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।
विज्ञापन

90 वर्षीय डॉ. सत्यव्रत शास्त्री ने 1947 से 1949 के मध्य इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। उसके बाद 1951 में स्नातक और 1953 में परास्नातक की पढ़ाई पूरी की। दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे। साथ ही जेएनयू के संस्कृत स्कूल में भी योगदान दिया। श्री जगन्नाथ संस्कृत यूनिवर्सिटी पुरी ओडिसा में वाइस चांसलर बने। इसके अलावा वह भारत सरकार के संस्कृत आयोग के अध्यक्ष बने। वर्तमान में वह प्रेसीडेंट एशिया इंस्टीट्यूट टोरिनो इटली भी हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें अब तक 108 अवार्ड मिल चुके हैं। शुक्रवार को पीयू की ओर से दिया जाने वाला 109वां अवार्ड होगा।
अपनी यादगार यात्रा को कुछ इस तरह किया बयां
बोले- 1977 में थाईलैंड की हररोयल हाईनेस महाचक्री प्रिंसेज सिरिन्थोर को संस्कृत से एमए करनी थी। वह बैंकॉक में शिक्षा ग्रहण कर रही थीं। थाईलैंड की सरकार ने भारत सरकार से अनुरोध किया कि महारानी को संस्कृत पढ़ाने के लिए किसी अनुभवी संस्कृत शिक्षक की व्यवस्था की जाए। उसके बाद भारत सरकार ने डॉ. सत्यव्रत शास्त्री का नाम तय किया और उन्हें पढ़ाने के लिए भेज दिया। उसी दौरान जब वह थाईलैंड में भ्रमण को निकले तो उन्हें शाकौन समेत कई नाम लिखे मिले। उसी के डॉ. शास्त्री को एक और काम मिल गया। वह खुश इसलिए थे कि संस्कृत के अभिलेख वहां मिलने लगे। उन्होंने बताया कि रामा स्टोरी साउथ एशिया पर काम कर रहे हैं। सात देशों की यात्रा के जरिये यह प्रोजेक्ट पूरा होगा। उन्होंने कहा, ग्रांड फादर पंडित चारूदेव शास्त्री संस्कृत के विद्वान थे, उन्हीं के जरिये यह सीखी। अब तक 36 किताबें लिख चुके हैं। वह अपने बेटे इंजीनियर शरद चंद्र के साथ पीयू पहुंचे थे। बेटे ने बताया कि उनके पिता सुबह चार बजे उठकर किताब लिखना शुरू कर देते हैं। ईमेल भेजनी हो या फिर और काम कंप्यूटर से करना हो, वह खुद टाइपिंग करते हैं।
विज्ञापन

89 वर्षीय डॉ. हीरा लूथरा अमेरिका में बढ़ा रहे पीयू का मान
- बोले, जितना शिक्षक यहां सप्ताहभर में पढ़ाते वहां एक पीरियड में होता है पढ़ाना
- विद्यार्थी चैप्टर खुद पढ़कर आते, हर स्टूडेंट्स बिना सवाल पूछे नहीं जाते कक्षा से
फोटो सहित
चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के पुराने छात्र डॉ. हीरा लूथरा वाकई हीरा साबित हुए। वह पीयू का अमेरिका में नाम ही नहीं बढ़ा रहे बल्कि वहां के स्टूडेंट्स को पीयू की खूबियां भी बता रहे हैं। शिक्षा की गुणवत्ता का पाठ भी वह पढ़ा रहे हैं।
89 वर्षीय हीरा लूथरा पीयू से संबद्ध डीएम कॉलेज मोगा से 1951 में पासआउट हुए थे। बीए ऑनर्स इकोनॉमिक्स की पढ़ाई यहां की थी। उसके बाद लखनऊ विश्वविद्यालय से लॉ की पढ़ाई की। 1955 में हीरा लूथरा को अपने ही कॉलेज में शिक्षक बनने का मौका मिल गया। उसके बाद 1960 में पीयू के शिमला स्थित कैंपस में उन्हें असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए बुला लिया गया। उसके बाद यूएस में पीएचडी की और एरिजोना वेस्टर्न कॉलेज में प्रोफेसर बन गए। कहते हैं कि पीयू का परसेप्शन अंतरराष्ट्रीय लेवल पर ठीक है। आगे भी पीयू को ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए कोशिश करते रहेंगे। उन्होंने बताया कि अमेरिका में शिक्षक एक घंटे में उतना स्टूडेंट्स को पढ़ाते हैं जितना यहां एक सप्ताह में पढ़ाया जाता है। वहां के हर स्टूडेंट्स के पास सवाल होते हैं जो कक्षा में टीचर से पूछे बिना नहीं जाते। उन्होंने कहा, पीयू के सभी पुराने विद्यार्थियों को एकजुटता से कार्य करते हुए आगे बढ़ना होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें