चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी का अगला वाइस चांसलर कौन होगा? इस पर पीयू के शिक्षकों व कर्मचारियों की नजरें टिकी हुई हैं। अब तक जितने भी वाइस चांसलर को चांसलर कार्यालय से एक्सटेंशन मिली है, उसका पत्र मार्च या अप्रैल तक पीयू को मिल जाते थे। वर्तमान वीसी प्रो. राजकुमार के कार्यकाल बढ़ाने के बारे में पीयू को अभी तक कोई पत्र चांसलर कार्यालय से प्राप्त नहीं हुआ। सूत्रों का कहना है कि प्रो. राजकुमार का कार्यकाल यहां बढ़ने की पूरी संभावनाएं हैं। वहीं, आरएसएस से जुड़े कुछ नए चेहरों की नजरें भी कुर्सी पर टिकी हैं।
वीसी प्रो. राजकुमार का कार्यकाल 22 जुलाई को पूरा हो जाएगा। वह तीन साल के लिए इस पद पर तैनात किए गए थे। 22 जुलाई को लगभग दो माह बचे हैं। अब तक उनका कार्यकाल नहीं बढ़ाया गया और न ही कोई पत्र मिला। सूत्रों का कहना है कि प्रो. राजकुमार पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र से आते हैं। उनकी संघ से लेकर भाजपा के नेताओं के साथ गहरी पैठ है। ऐसे में उन्हें आश्वासन मिल चुका है कि वह अगली कप्तानी भी करेंगे। यही कारण बताया जा रहा है कि पत्र अब तक जारी नहीं हुआ। बताते हैं कि इसी कारण इस समय वीसी प्रो. राजकुमार खुलकर बैटिंग कर रहे हैं। सिंडिकेट व सीनेट के चुनाव न करवाने का फैसला भी लिया गया। हालांकि कोरोना इसका कारण बताया गया। वहीं दूसरी ओर पीयू में यह चर्चा भी हो रही है कि वीसी प्रो. राजकुमार को राजस्थान के एक केंद्रीय विश्वविद्यालय के वीसी बनने की तैयारी है।
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वीसी ने ये कार्य करवाए, कुछ लंबित भी पड़े
वीसी प्रो. राजकुमार ने पीयू समेत देशभर के शिक्षकों को पीएचडी इंक्रीमेंट का लाभ दिलाया, जो काफी वर्षों से लंबित था। इसके अलावा पीयू को रूसा के तहत 55 करोड़ का प्रस्ताव केंद्र से पास करवाया। ऊष्मायन केंद्र की स्थापना करवाई। कई अन्य कार्य भी जुड़े हैं। वहीं दूसरी ओर पीयू में छात्रों की संख्या के मुताबिक शिक्षकों की तैनाती नहीं करवा पाए। हालांकि रिक्तियां निकाली गई थी, लेकिन सिंडिकेट ने रोक लगा दी। छोटे विभागों का विलय नहीं हो पाया। इसके लिए कमेटी जरूर कार्य कर रही है। सभी शिक्षकों की पदोन्नति पूरी नहीं हो सकी। कुछ के पदोन्नति पत्र अटके हुए हैं। पिछली सेवा का लाभ भी शिक्षकों को अब तक नहीं दिलवा सके। कुछ को जरूर इसका लाभ मिला।