निरफ रैंकिंग में भले ही पीयू पिछड़ गया हो लेकिन नैक की ग्रेडिंग में बाजी मारने के लिए पीयू ने कमर कस ली है। इसके लिए फीडबैक फार्म तैयार कर लिए हैं। ये फार्म शिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को दिए जाएंगे जो पढ़ाई के प्रभाव पर फीडबैक देंगे। इसके अलावा प्रोग्राम कोर्स संचालित किए जाएंगे और वैल्यू एडेड कोर्स का संचालन होगा। यह कार्य पीयू लगभग कर चुका है। इन प्रस्तावों को सिंडिकेट में ले जाया जाएगा, जहां इस पर मुहर लगेगी।
पीयू में नैक की टीम ने 2015 में निरीक्षण किया था। इस दौरान नैक की टीम ने कई आपत्तियां दर्ज की थीं। साथ ही कई सुझाव भी दिए थे। उसमें प्रमुख यही था कि छात्रों से पीयू फीडबैक नहीं ले रहा था। ऐसे में शिक्षण कार्य के प्रभावी होने के चांसेज कम होते हैं क्योंकि शिक्षक जो चाहे पढ़ा देते हैं। ऐसे में फीडबैक लेने को नैक की टीम ने जरूरी माना था। इसके अलावा प्रोग्राम कोर्स का संचालन नहीं किया जा रहा था। स्मार्ट क्लासरूम नहीं थे। वाईफाई कैंपस नहीं किया गया था।
छात्रों की संख्या के मुताबिक हॉस्टलों की संख्या कम पाई गई थी। कई अन्य सुझाव भी दिए गए थे। पीयू ने दो साल तो इन सुझावों पर काम नहीं किया लेकिन बाद में शुरू किया। पीयू ने सोचा कि 2020 में फिर नैक की ग्रेडिंग होगी। ऐसे में सभी मानकों की पूर्ति नहीं हो पाएगी। ऐसे में पीयू ने नैक से दो साल का अतिरिक्त समय लिया था। पीयू में नैक की टीम 2022 में निरीक्षण करने आएगी। उससे पहले पीयू मानकों की पूर्ति में लगा है। कोरोना के कारण तैयारियां थोड़ी प्रभावित हुई थीं लेकिन अब फिर से इन्होंने गति पकड़ ली है।
विभागों को मर्ज करना होगा
नैक की टीम ने यह सुझाव दिया था कि छोटे-छोटे विभागों का संचालन न किया जाए। इससे मैनपॉवर आदि अधिक लगती है। कई सवाल भी खड़े किए थे जिनका मुख्य उद्देश्य था कि इन छोटे-छोटे विभागों को मर्ज किया जाए। कुछ विभाग मर्ज हो गए थे लेकिन बड़ी संख्या में विभाग रह गए। इन विभागों को भी मर्ज करना होगा तभी पीयू को बेहतर ग्रेड मिल सकेगा। मालूम हो कि पीयू ने अब तक तीन से चार बार ही विभागों के मर्ज को लेकर बैठक की है। प्रस्ताव भी तैयार किया गया था लेकिन सहमति नहीं बन पाई। लैंग्वेज कोर्स के मर्ज को लेकर हंगामा खड़ा हो गया था।
नैक की ग्रेडिंग 2022 में होगी। इसकी तैयारियां तेजी से चल रही हैं। फीडबैक फार्म तैयार हो गए हैं। प्रोग्राम कोर्स संचालन पर काम चल रहा है। इन सभी प्रस्तावों को सिंडिकेट में ले जाया जाएगा। वहां से मंजूरी मिलेगी।
- डॉ. आशीष जैन, निदेशक, आईक्यूएसी