चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी शासन सुधार को लेकर उच्च स्तरीय समिति की बैठक बुधवार को करने जा रही है। इसी के साथ समिति आए सुझावों के पोर्टल को खोलकर उन्हें सामने रखेगी और उन पर विचार करेगी। बेहतर सुझावों का समिति स्वागत करेगी।
बोर्ड ऑफ गवर्नेंस के लिए आने वाले सुझावों पर भी बात होगी। हालांकि गवर्नेंस की तभी जरूरत महसूस होगी, जब सीनेट व सिंडिकेट के बनाए नियमों में बड़ा फेरबदल होगा, क्योंकि फेरबदल करने की समिति फिर गवर्नेंस बॉडी बना सकती है। बताया जा रहा है कि फैसले वही होंगे, जिसमें पीयू समेत शिक्षकों, विद्यार्थियों व कर्मचारियों का भला होगा।
उच्चस्तरीय समिति ने 10 मार्च को पहली बैठक आयोजित की थी। इसके बाद ही पीयू के हितधारकों से एक सप्ताह तक पोर्टल के जरिए सुझाव मांगे गए थे। 19 मार्च तक सुझाव दिए गए। उसी दौरान सुझावों के लिए तिथि बढ़ाकर 26 मार्च कर दी गई। 24 मार्च को समिति की दूसरी बैठक होगी। सूत्रों का कहना है कि बैठक में 19 मार्च तक आने वाले सुझावों पर विचार करेगी और उनका निष्कर्ष निकालेगी। जानकारी मिली है कि 50 से अधिक लोगों ने सुझाव दिए हैं। इसमें किसी ने सीनेट सुधार तो किसी ने सिंडिकेट सुधार के लिए सुझाव भेजे हैं। डीन की तैनाती से लेकर स्नातक वर्ग चुनाव के बारे में भी सुझाव दिए हैं।
समिति का मुख्य उद्देश्य, बिना राजनीति के पीयू का बेहतर हो संचालन
उच्च स्तरीय समिति के 11 सदस्य हैं। सूत्रों का कहना है कि समिति का गठन चांसलर कार्यालय की ओर से इसलिए किया गया है कि पीयू का संचालन बेहतर हो और जो नियम बाधा बन रहे हैं उनमें सुधार किया जाए। समिति का उद्देश्य है कि कैंपस के सदन राजनीति से अलग रहें। केवल शैक्षिक निर्णय की बात हो। उसी हिसाब से सुधार होंगे। सूत्रों का कहना है कि सीनेट व सिंडिकेट का ढांचा तो वही रहेगा, लेकिन नियमों में बदलाव होगा। सीनेट का बड़े स्तर पर होने वाला चुनाव का दायरा कम होगा। साथ ही शिक्षकों की भागीदारी सीनेट में अधिक होगी। बाहरी लोगों के प्रवेश को कम किया जाएगा। डीन के लिए भी विशेषज्ञ तैनात हों, इसके लिए भी अलग से दिशानिर्देश तैयार होंगे। बताया जाता है कि बुधवार को होने वाली बैठक में शासन सुधार को लेकर 70 फीसदी काम पूरा हो जाएगा। 30 फीसदी निर्णय 26 मार्च तक आने वाले सुझावों के बाद लिए जाएंगे।