चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के पांच वर्षीय कानून के कोर्स में दाखिले मेरिट से ही होंगे। इसके लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। पीयू की ओर से बनाई गई कमेटी ने शनिवार को यह निर्णय लिया। इस निर्णय के तर्कों को सोमवार को उच्च न्यायालय में रखा जाएगा। अब न्यायालय के निर्णय पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
पीयू के विश्वविद्यालय विधि अध्ययन संस्थान में पांच साल तक विद्यार्थियों को कानून की पढ़ाई करवाई जाती है। इस विभाग में प्रवेश प्रक्रिया पिछले साल तक परीक्षा के जरिए होती थी, लेकिन इस बार कोरोना के कारण प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं की जा सकी और दाखिले मेरिट के आधार पर करने का निर्णय लिया गया। इस निर्णय को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई और उच्च न्यायालय ने पीयू से दोबारा जवाब मांगा है। पीयू प्रशासन की ओर से बनाई गई कमेटी ने शनिवार को यही तय किया है कि प्रवेश परीक्षा अब आयोजित करना आसान नहीं होगा। छात्रों को तमाम तकलीफों से गुजरना होगा। तमाम तर्कों के साथ कमेटी ने प्रवेश मेरिट से ही करने का निर्णय लिया है। सूत्रों का कहना है कि यही जवाब उच्च न्यायालय में पीयू के वकील की ओर से दाखिल किया जाएगा। उसके बाद उच्च न्यायालय की ओर से अंतिम निर्णय दिया जाएगा।