चंडीगढ़। अल्जाइमर एक गंभीर दिमागी बीमारी है, जिसमें व्यक्ति की याददाश्त धीरे-धीरे कमजोर होती जाती है और सोचने-समझने की क्षमता पर असर पड़ता है। इस बीमारी का अब तक कोई पक्का इलाज नहीं है और उपलब्ध दवाएं केवल कुछ समय के लिए लक्षणों को कम करती हैं। ऐसे में पंजाब विश्वविद्यालय से एक नई रिसर्च ने अल्जाइमर के इलाज की दिशा में उम्मीद जगाई है। पंजाब विश्वविद्यालय के बायोफिजिक्स विभाग के शोधार्थी डॉ. रिमलजोत सिंह ने अपनी टीम के साथ मिलकर इस बीमारी पर शोध किया है। यह शोध डॉ. तनजीर कौर के मार्गदर्शन में किया गया, जिसमें नवप्रीत कौर और शिवानी शर्मा ने भी सहयोग दिया।
शोध में वैज्ञानिकों ने ऐसे नए रासायनिक पदार्थ विकसित किए हैं, जो दिमाग में बनने वाले हानिकारक तत्वों को रोकने में मदद कर सकते हैं। इन तत्वों के कारण ही अल्जाइमर की बीमारी बढ़ती है। पहले किए गए अध्ययनों में कुछ दवाओं के अच्छे नतीजे सामने आए थे, लेकिन वह दिमाग तक ठीक से नहीं पहुंच पाते थे, इसलिए उनका इस्तेमाल सीमित रहा।
नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने कंप्यूटर की मदद से हजारों संभावित दवाओं का अध्ययन किया और उनमें से दो सबसे प्रभावी विकल्प चुने। इन दोनों नए पदार्थों ने दिमाग के लिए सुरक्षित होने के साथ-साथ बीमारी से जुड़े नुकसान को कम करने की क्षमता दिखाई। शोधकर्ताओं के अनुसार शुरुआती परीक्षणों में खासकर जानवरों पर किए गए प्रयोगों में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। हालांकि इसे आम इलाज के रूप में लाने से पहले अभी और विस्तृत परीक्षण जरूरी हैं। यह शोध अल्जाइमर जैसी लाइलाज मानी जाने वाली बीमारी के लिए भविष्य में असरदार दवा विकसित होने की उम्मीद को मजबूत करता है और पीयू की वैज्ञानिक उपलब्धियों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।