चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के लिए इस साल आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। अब तक पीयू का बजट पास नहीं हो सका है। इस कार्य में लगभग तीन माह देरी हो चुकी है। इसकी चिंता किसी को नहीं है। इस विलंब के कारण यह बजट यूजीसी के बजट में शामिल नहीं हो पाएगा। बताया जाता है कि यूजीसी का बजट अक्तूबर माह में पास होता है। ऐसे में पीयू के बजट को अलग से प्रस्ताव पहुंचेगा और इसमें देरी होगी तो बजट की वृद्धि आदि प्रभावित हो सकती है।
पीयू हर साल बोर्ड ऑफ फाइनेंस की बैठक आयोजित कर बजट पास करती है। उसके बाद यह बजट सिंडिकेट के जरिए सीनेट में जाता है और सितंबर तक यह पास हो जाता है। हर साल लगभग 550 करोड़ का बजट होता है। इस बार भी बोर्ड ऑफ फाइनेंस की बैठक रखी गई थी, लेकिन कोरम पूरा नहीं हो पाया। इसके कारण बजट की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। सूत्रों का कहना है कि अफसर इस बार सीनेट व सिंडिकेट के कार्यकाल को खत्म करने के इंतजार में थे, लेकिन बजट को उनको पास करना चाहिए था। यही नहीं संशोधित बजट भी पिछले साल ही मंजूर होना था, वह भी नहीं हो पाया। ऐसे में पीयू के लिए नया बजट कहां से मिलेगा और कब मिलेगा, यह सवाल खड़ा हो गया है। वेतन को लेकर दिक्कत आएगी। पहले ही पीयू आर्थिक संकट से जूझ रही है। एमटीएस कर्मचारियों से काम लेने पर अभी तक निर्णय नहीं हो पाया। नए शिक्षकों की तैनाती होगी तो उसके लिए वित्तीय अनुमति लेनी होगी। इससे आर्थिक भार और बढ़ेगा। सूत्रों का कहना है कि पीयू को बिना देरी किए बजट को यूजीसी तक पहुंचाना चाहिए।
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सदस्यों की भी रही ढील
सूत्रों का कहना है कि बोर्ड ऑफ फाइनेंस की एक बैठक के बाद दूसरी बैठक ऑनलाइन बुलाई गई थी। कुछ सदस्यों की मांग थी कि बैठक ऑफलाइन आयोजित हो। पीयू प्रशासन ने कोरोना को इसमें बाधा बताया और ऑनलाइन बैठक ही आयोजित करने को कहा, लेकिन सदस्य नहीं माने। जानकारों का कहना है कि सदस्यों को पीयू की बेहतरी के लिए बैठक में शामिल होना चाहिए था ताकि बजट पास हो जाता। अब इस खींचतान का खामियाजा अन्य लोगों को भुगतना पड़ सकता है। हालांकि पीयू प्रशासन बजट पारित करने को लेकर अब तेजी दिखा रहा है। जनवरी माह में ही पंजाब यूनिवर्सिटी का यह बजट पास हो सकता है।