चंडीगढ़। पीयू प्रबंधन के आठ विद्यार्थियों को एक महीने तक डिटेन करने के निर्णय का सभी छात्र संगठनों ने जमकर विरोध किया। शुक्रवार को वीसी कार्यालय के बाहर विद्यार्थियों के विरोध प्रदर्शन के बाद पीयू प्रबंधन अपने फैसले पर यू टर्न लेता दिख रहा है। पीयू की केंद्रीय समिति ने सात विद्यार्थियों के डिटेंशन के आदेश पर दोबारा विचार करने का निर्णय लिया है। समिति की बैठक के बाद आदेश वापस लेने के आसार हैं। एबीवीपी के अलावा सभी छात्र संगठनों ने एकजुटता दिखाते हुए पीयू प्रबंधन के ओबीसी आरक्षण के प्रदर्शन में शामिल विद्यार्थियों को डिटेन करने के फैसले को विरोध किया। छात्र नेताओं ने पक्ष रखा कि संवैधानिक अधिकारों की मांग करना उनका जायज हक है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए प्रबंधन उनके खिलाफ ऐसे आदेश जारी नहीं कर सकता। विद्यार्थियों ने प्रदर्शन स्थल पर बढ़ती पुलिसकर्मियों की संख्या का भी विरोध किया और पीयू प्रबंधन द्वारा उनकी आवाज को दबाने के आरोप लगाए। एसएफएस, सथ, पीएसयू ललकार, एनएसयूआई, सोपू, एएसए, आईएसए आदि छात्र संगठन प्रदर्शन में मौजूद रहे। इसके तहत डिटेंशन किए आठ विद्यार्थियों को पीयू प्रबंधन द्वारा बात करने के लिए बुलाया गया। डीएसडब्ल्यू प्रो. अमित चौहान ने बताया कि सात विद्यार्थियों ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे और यूनिवर्सिटी की कार्यकारिणी को प्रभावित नहीं करेंगे। विद्यार्थियों से मिले आश्वासन पर पीयू में केंद्रीकृत स्तर पर गठित समिति सात विद्यार्थियों के डिटेंशन आदेश पर दोबारा विचार करेगी। अब समिति को आठवें छात्र संदीप से उनके पूछे सवालों के जवाब मिलने का इंतजार है जिसके आधार पर दोबारा आदेश पर विचार किया जाएगा।
बीएसपी प्रत्याशी डॉ. रितु सिंह ने किया विद्यार्थियों का समर्थन
बीएसपी की ओर से चंडीगढ़ लोकसभा सीट प्रत्याशी डॉ. रितु सिंह ने भी प्रदर्शन में आकर विद्यार्थियों का समर्थन किया। पीयू प्रबंधन द्वारा विद्यार्थियों को हिरासत में लेने के निर्णय को रितु ने प्रशासन की दबाव बनाने की रणनीति बताया और कहा कि ओबीसी आरक्षण संवैधानिक मांग है। पीयू प्रबंधन केंद्र के नियमों व आबादी के अनुसार ओबीसी आरक्षण लागू करे जिससे विद्यार्थी भी प्रदर्शन समाप्त कर कक्षाओं में पढ़ पाएंगे।