अगर आम आदमी होते तो बिजली विभाग का लाइनमैन दूसरे बिल पेंडिंग होने पर मकान में रहने वालों को अंधेरे में रहने के लिए मजबूर कर देता। लेकिन अब आपको इसकी दूसरी तस्वीर भी बताते हैं, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) को जबरदस्त झटका दिया है। कैग ने वित्तीय अनियमितताओं की पोल खोल दी है।
सूबे के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल यह दावा करते रहे कि पंजाब में बिजली सरप्लस है, उसके उलट कैग ने वर्ष 2015-16 की अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि पीएसपीसीएल ने बिजली की कमी दूर करने के लिए निजी थर्मल पावर प्लांट कंपनियों से आंख मूंदकर दीर्घकालीन समझौते किए, जिसमें यह भी तय कर लिया गया कि सरकार संबंधित कंपनी से अगले 25 साल तक करार नहीं तोड़ेगी। साथ ही कंपनी के बिजली खरीद का जो दाम तय कर लिया गया है, वह बिजली की जरूरत न होने पर भी कायम रहेगा।
कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि पीएसपीसीएल ने बिजली खरीदने के लिए निजी कंपनियों को 2249.61 करोड़ रुपये की ज्यादा अदायगी कर दी। इस राशि में से 1427.84 करोड़ का बोझ सूबे में बिजली उपभोक्ताओं पर डाल दिया। पीएसपीएल ने बिजली बिलों की वसूली में भी ढील दिखाई। अब बिलों के रूप में पीएसपीएल के 1083 करोड़ रुपये उपभोक्ताओं पर ही बकाया हैं।
बुधवार को आडिट भवन में पंजाब के अकाउटेंट जरनल जगवंश सिंह ने बताया कि पीएसपीसीएल ने निजी बिजली कंपनियों में से कुछ के साथ तो 25 साल के समझौते कर रखे हैं। इन समझौते में यह शर्त नहीं है कि पीएसपीसीएल किसी भी समय समझौता रद्द कर सकता है। ऐसे में पंजाब सरकार के लिए अब इन निजी कंपनियों से महंगे दाम पर भी बिजली खरीदते रहना मजबूरी बन चुका है। दूसरी ओर, निजी कंपनियों से बिजली खरीदने के करार के चलते पंजाब में स्थापित तीनों सरकारी थर्मल प्लांट बंद हो गए हैं, जिनसे सस्ती बिजली मिल सकती थी।
सरकारी थर्मल प्लांटों में उत्पादन कम करने का खुलासा
सरकारी थर्मल प्लांटों में उत्पादन
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2013 से 2016 के बीच पंजाब सरकार ने बिजली की बढ़ी जरूरतों को देखते हुए पहले तो निजी बिजली उत्पादकों से बिजली खरीदनी शुरू की, बाद में सरकारी थर्मल प्लांटों में उत्पादन कम कर दिया गया। तीनों थर्मल स्टेशनों में वर्ष 2013-14 से 2015-16 के दौरान रिजर्व आउटजेज की प्लांट उपलब्ध फैक्टर से प्रतिशतता 13.38 से 70.34 के बीच आंकी गई थी।
लेखा जांच में पाया गया कि वर्ष 2013-14 के अप्रैल से फरवरी और वर्ष 2014-15 के अप्रैल से सिंतबर माह के दौरान पीएसपीसीएल ने क्त्रस्मश: 62 लाख और 8135 लाख यूनिट प्रति माह 2.86 रुपये प्रति यूनिट से 3.95 रुपये प्रति यूनिट की औसत दरों पर व्यापारियों से बिजली एक्सचेंज द्वारा बोली लगाकर खरीद की।
हालांकि उस समय सरकार के थर्मल प्लाटों के पास क्रमश: 2.52 रुपये प्रति यूनिट से 2.67 रुपये प्रति यूनिट और 2.74 रुपये प्रति यूनिट से 3.15 रुपये प्रति यूनिट की अस्थाई लागत से अपनी जरूरत पूरा करने के लिए अतिरिक्त उत्पादन की क्षमता थी। लेकिन सरकारी थर्मल प्लांटों को बंद कर ऊंची दरों पर बिजली खरीदने के कारण 183.25 करोड़ का अतिरिक्त खर्च कर दिया गया।
खरीदी गई बिजली पर छूट लेने में भी असफलता
यह भी खुलासा हुआ है कि पीएसपीसीएल के अपने तीनों थर्मल प्लांट बंद हैं। वहीं पंजाब सरकार ऊंचे दाम पर निजी कंपनियों से बिजली खरीद रही है। पीएसपीसीएल ने खरीदी गई बिजली पर 22.33 लाख रुपये की छूट लेने में भी असफल रही है।
बल्कि पीएसपीसीएल ने 2246.61 करोड़ रुपये की अतिरिक्त अदायगी कर दी और उसमें से 1427.84 करोड़ का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल दिया।वर्ष 2015-16 के दौरान, पीएसपीसीएल द्वारा उज्जवल डिस्काम एशोरेंस योजना लागू करने के उद्देश्य से लिए गए 5597 करोड़ रुपये को लोन के भुगतान के चलते कंपनी पर कर्ज का बोझ 5698 करोड़ रुपये हो गया।