इससे भारत के धर्म निरपेक्ष ढांचे को नुकसान होगा। यह बिल देश के संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि हमें इस बात पर कोई ऐतराज नहीं है कि विभिन्न धर्मो को मानने वालों को नागरिकता संशोधन बिल में राहत दी गई है बल्कि एतराज यह है कि मुसलमानों को ही क्यों निशाना बना के बाहर रखा गया है।
शाही इमाम ने कहा कि हमने अपने वतन की आजादी, एकता और अखंडता के लिए बेमिसाल कुर्बानियां दी हैं, हम अपने ही वतन में अपने ऊपर किसी काले कानून को थोपने नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि भारत देश धर्म निर्पेक्षता का रखवाला है। इस देश में किसी की मनमर्जी नहीं चल सकती।
उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक ताकते देश में हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई और दलित भाईचारे को तोड़ना चाहती हैं। नागरिकता संशोधन बिल में आने वाले लोगों को भी ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं आजकल राजनीति में कोई धर्म नहीं रहा सिर्फ सत्ता का लालच है, तभी तो आए दिन देश में गठजोड़ की सरकारें बन रही हैं और यह सरकारें क्या पता कब क्या संशोधन कर कब किस कौम को बाहर निकाल दें।
शाही इमाम ने कहा कि नागरिकता बिल में संशोधन संवेदनशील मामला है इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस मामले को लेकर जल्दी ही पंजाब भर की मस्जिदों के इमामों और प्रबंधकों की लुधियाना में मीटिंग बुलाई जाएगी, जिसमें राज्यस्तरीय रोष प्रदर्शन की रणनीति तय की जाएगी। प्रदर्शन के बाद डीसी को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया गया।