चंडीगढ़। आयुष चिकित्सकों को सर्जरी की अनुमति देने के सरकार के निर्णय के विरोध में आईएमए चिकित्सकों के साथ ही इंडियन डेंटल एसोसिएशन स्टूडेंट नेटवर्क और जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने मंगलवार को विरोध प्रदर्शन किया। मॉडर्न मेडिसिन के डॉक्टरों का कहना है कि सरकार भारत में प्रचलित चिकित्सा पद्धतियों की खिचड़ी पकाने की प्रक्रिया को बंद करें। इससे न तो किसी पद्धति का भला होगा न ही किसी मरीज का। इसलिए सेंट्रल काउंसिल फॉर इंडियन मेडिसिन एक्ट के तहत आयुर्वेदिक डॉक्टर को सर्जरी की अनुमति देने के निर्णय को वापस लेना होगा।
डॉक्टरों ने सेक्टर- 35 स्थित आईएमए भवन में एकत्रित होकर शांतिपूर्ण तरीके से इसका विरोध जताया। आईएमए समन्वय समिति के अध्यक्ष व विश्व चिकित्सा संघ के सलाहकार डॉ. रमनीक सिंह बेदी और आईएमए अध्यक्ष डॉ. विनीता गुप्ता का कहना है कि आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए शॉर्टकट की नीति खतरनाक साबित हो सकती है, क्योंकि आयुर्वेद में एनेस्थीसिया देने की कोई विधि नहीं है, न ही सर्जरी में प्रयोग किए जाने वाले उपकरणों के बारे में ही कोई जानकारी दी गई है। अगर सरकार चाहती है कि आयुर्वेदिक डॉक्टर भी सर्जरी करें तो इसके लिए नियमानुसार उन्हें प्रशिक्षित किया जाना चाहिए जिससे पद्धति और मरीज दोनों का भला हो सके। डॉ. बेदी का कहना है कि इस एक्ट के तहत आयुर्वेदिक डॉक्टर को मास्टर ऑफ सर्जरी की उपाधि दी जाएगी जो उचित नहीं होगा । सरकार को इस उपाधि को लेकर भी अपना निर्णय बदलना होगा। उनका कहना है कि इस एक्ट के तहत आयुर्वेदिक डॉक्टरों को 62 तरह की सर्जरी करने की अनुमति दी जा रही है, लेकिन सोचने वाली बात यह है कि उन सर्जरी से जुड़ी समुचित जानकारी आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में नहीं बताई गई है। उनसे संबंधित छोटी मोटी जानकारियां के बल पर आयुर्वेदिक चिकित्सक वो सर्जरी सफलतापूर्वक कैसे कर पाएंगे। इसलिए इस पर रोक लगाया जाना बेहद जरूरी है।