चंडीगढ़ में ट्रिब्यून चौक पर लगने वाले जाम से निजात पाने के लिए वहां फ्लाईओवर बनेगा या दिल्ली के एम्स की तर्ज पर सिग्नल फ्री इंटरचेंज, इसको लेकर आज फैसला हो जाएगा। यूटी सचिवालय में वित्त सचिव अजॉय कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में इसको लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। इसमें नेशनल हाईवे पीडब्ल्यूडी पंजाब के चीफ इंजीनियर, हाउसिंग बोर्ड के चीफ इंजीनियर, नगर निगम के चीफ इंजीनियर, स्टूप कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड समेत प्रशासन के कई अन्य अधिकारी उपस्थित रहेंगे।
ट्रिब्यून चौक पर बनने वाले फ्लाईओवर पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की रोक के बाद प्रशासन ने विकल्प तलाशने के लिए शहरवासियों की मदद ली थी। लोगों ने कई अलग-अलग सुझाव प्रशासन को दिए थे। एडवाइजर मनोज परिदा ने वित्त सचिव अजॉय कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में यूटी के विभिन्न विभागों के चीफ इंजीनियर की एक कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने लोगों द्वारा दिए सुझाव को देखा और फिर उसमें से 7 सुझाव शॉर्ट लिस्ट किए। इन सातों सुझावों को विस्तृत रूप से समझने के लिए इन लोगों को बुलाया गया और फिर विभिन्न चरणों के बाद 6 को रद्द कर दिया गया।
संरचनात्मक (स्ट्रक्चरल) इंजीनियर तरुण माथुर का सिग्नल फ्री इंटरचेंज का सुझाव सभी अधिकारियों को काफी पसंद आया। लेकिन यूटी के इंजीनियरिंग विभाग की तरफ से तरुण माथुर के प्रस्ताव को लेकर आपत्ति जताई गई। वीरवार को बुलाई गई बैठक में इन आपत्तियों को देखा जाएगा। अगर बैठक में तरुण माथुर के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी जाती है तो ट्रिब्यून चौक पर फ्लाईओवर की जगह सिग्नल फ्री इंटरचेंज ही बनाया जा सकता है। हालांकि प्रशासन कमेटी के फैसलों को हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने रखेगा।
यह है तरुण माथुर का प्रस्ताव
तरुण माथुर ने बताया कि उनका प्रस्ताव दिल्ली में एम्स के पास स्थित चौक की तर्ज पर है। चंडीगढ़ के हेरिटेज स्टेटस को देखते हुए फ्लाईओवर ठीक नहीं है। इसलिए उनका प्रस्ताव जमीन से महज 2 मीटर ऊंचा और साढ़े 4 मीटर नीचे होगा। यह पूरी तरह से सिग्नल फ्री होगा। किसी भी तरफ जाने के लिए लोगों को किसी भी लाल बत्ती व कहीं भी रुकना नहीं पड़ेगा।
यह ट्रैफिक को घुमा कर डायवर्ट कर देगा। इससे जाम लगने की स्थिति पैदा नहीं होगी। लोग चौक से घूमते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचेंगे। उन्होंने बताया कि प्रशासन की तरफ से बनाए जाने वाले फ्लाईओवर का खर्चा सैकड़ों करोड़ है, जबकि उनके द्वारा तैयार किया गया यह प्रस्ताव सिर्फ 60 करोड़ में पूरा हो सकता है।
तरुण माथुर के प्रस्ताव पर इंजीनियरिंग विभाग को है यह आपत्ति
वित्त सचिव अजॉय कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में कमेटी की बीते दिनों हुई बैठक में सभी सदस्यों ने तरुण माथुर के प्रस्ताव पर लगभग सहमति जता दी थी। लेकिन यूटी के इंजीनियरिंग विभाग और ट्रिब्यून चौक के रखे गए कंसल्टेड कंपनी स्टूप कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से इसका विरोध किया गया था।
इंजीनियरिंग विभाग ने यह तर्क दिया था कि इस प्रस्ताव के लिए काफी जमीन भूमि अधिग्रहण करने की जरूरत पड़ेगी। जानकारी के अनुसार अगर प्रशासन तरुण माथुर के प्रस्ताव को लेकर आगे बढ़ता है तो ट्रिब्यून, पेप्सू की कुछ जमीन को अधिग्रहण करना पड़ेगा।
बैठक में प्रशासन ने कंसलटेंट कंपनी को भी बुलाया
प्रशासन ने पूरे मामले को अच्छे से समझने के लिए व इंजीनियरिंग विभाग व कंसलटेंट कंपनी की तरफ से उठाए गए आपत्तियों पर चर्चा के लिए बैठक बुलाई है। इसमें कंसलटेंट कंपनी स्टूप कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड को भी बुलाया गया है, जो अपनी आपत्तियों को प्रशासन के सामने रखेंगे।
प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि बैठक में अगर सहमति बन जाती है व इंजीनियरिंग विभाग की तरफ से उठाई गई आपत्तियों को सुलझा लिया जाता है, तो फ्लाईओवर की जगह का सिग्नल फ्री इंटरचेंज का निर्माण किया जा सकता है।