चंडीगढ़ के 13 गांवों में होने वाले विकास का रास्ता साफ हो गया है। प्रशासक की मंजूरी के बाद प्रशासन ने 13 गांवों को नगर निगम में शामिल करने पर अंतिम मुहर लगा दी। फिलहाल इन गांवों में पंचायत थी, जिनका कार्यकाल दिसंबर में समाप्त होने वाला था। अंतिम मंजूरी के लिए फाइल प्रशासक के पास भेजी गई थी, जहां से मंजूरी मिलने के बाद शुक्रवार को यूटी के प्रिंसिपल होम सेक्रेटरी अरुण कुमार गुप्ता ने इस संदर्भ में देर शाम फाइनल नोटिफिकेशन जारी कर दिया।
प्रिंसिपल होम सेक्रेटरी ने बताया कि संबंधित अफसरों को इस नोटिफिकेशन की कापियां भी भेज दी गई हैं। उन्होंने बताया कि गांवों के नगर निगम में शामिल होने के बाद अब आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसमें सबसे पहले यह देखा जाएगा कि कौन सा गांव किस वार्ड के साथ लगता है। इसके बाद वार्डबंदी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वार्डबंदी के अनुसार ही गांव को उस वार्ड के अंदर समाहित कर लिया जाएगा।
अब डीडीपीओ गांव में कराएंगे विकास
प्रिंसिपल होम सेक्रेटरी अरुण कुमार गुप्ता ने कहा कि अभी नगर निगम के चुनाव में तीन साल का वक्त पड़ा है। लिहाजा, वार्डबंदी करने के लिए काफी समय पड़ा है। उधर, जब उनसे यह पूछा गया कि गांवों की पंचायत का कार्यकाल तो पूरा हो चुका है। अभी नगर निगम के चुनाव में तीन साल का समय पड़ा है। प्रिंसिपल होम सेक्रेटरी ने बताया कि निगम के चुनाव तक गांवों में विकास के लिए डीडीपीओ या अन्य अधिकारियों को लगाया जाएगा, जो यहां के मसले देखेंगे और जरूरी कामों का निपटारा कराने के साथ ही विकास का खाका खींचेंगे।
ऐसे बनी पूरी रूपरेखा
13 गांवों में से कई की पंचायत 31 दिसंबर तो कई की 5 जनवरी और कुछ की 10 जनवरी को भी समाप्त हो रही है। दड़वा के सरपंच गुरप्रीत सिंह ने बताया कि 29 सितंबर को उनकी प्रशासक वीपी सिंह बदनौर के साथ मीटिंग हुई थी, जिसमें उन्होंने लाल डोरे के बाहर बसी आबादी का एरिया भी नगर निगम में शामिल करने पर सहमति जताई थी।
ये गांव एमसी में हुए शामिल
इन गांवों में किशनगढ़, मौली जागरां, दरिया, रायपुर कलां, मक्खन माजरा, बहलाना, रायपुर खुर्द, धनास, सारंगपुर, खुड्डा अलीशेर, खुड्डा जस्सू, लाहौरा और कैंबवाला का एरिया शामिल है।
लाल डोरे पर स्थिति साफ नहीं
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि लाल डोरे से बाहर बने मकानों व आबादी को भी इसमें शामिल किया जाएगा या नहीं। इसको लेकर प्रशासक वीपी सिंह बदनौर के साथ 29 सितंबर को गांवों के सरपंचों की मीटिंग हुई थी, जिसमें सहमति बनी थी कि लाल डोरे के क्षेत्र को भी गांवों के साथ ही नगर निगम में शामिल कर लिया जाएगा।