जानकारी के मुताबिक इस मामले को लेकर क्लर्क और अकाउंटेंट के खिलाफ एक्सईएन की ओर से शिकायत दी गई थी जिसमें आरोप था कि दोनों ने यूएचबीवीएन बिलासपुर के ऑपरेशन डिवीजन में धोखाधड़ी की है। यह धोखाधड़ी दोनों अधिकारियों ने उस समय की, जव वे वहां पर सेवाएं दे रहे थे। विभागीय जांच में कुछ फर्जी वाउचर मिले थे, जिसके जरिए कई संदिग्ध लोगों के खातों में करोड़ों की ट्रांजेक्शन की गई थी। विभागीय जांच रिपोर्ट के मुताबिक चेक संख्या 522976, दिनांक 16 जून 2016, जिसकी राशि तीन लाख 64 हजार 551 रुपये गुलजार सिंह के नाम, चेक संख्या 981139, दिनांक 12 अगस्त 2016, जिसकी राशि 33 लाख 5 हजार 428 रुपये गुलजार सिंह के नाम, चेक संख्या 982138, दिनांक 31 अगस्त 2016 राशि 8 लाख 68 हजार 282 रुपये गुलजार सिंह के नाम, चेक संख्या 981191 दिनांक 29 अगस्त 2016 राशि 9 लाख 38 हजार 622 कंवलजीत कौर के नाम पर जारी किए गए थे। इस मामले में 21 फरवरी 2022 को यमुनानगर के सिटी थाने में दोनों कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। संवाद
ईडी की जांच में खुली फर्जीवाड़े की पोल : यह मामला सरकारी खातों में गबन से जुड़ा होने के कारण इसकी जांच ईडी चंडीगढ़ को सौंपी गई थी। ईडी की जांच में पता चला कि यूएचबीवीएन, यमुनानगर के अधिकारियों ने फर्जी वाउचर तैयार किए और इन फर्जी भुगतान वाउचर के आधार पर उन्होंने चेक तैयार किए। बाद में विभिन्न राशि के चेक अपात्र लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा करवा दिए गए। जांच में यह भी पता चला कि 1297 गैर-वास्तविक लाभार्थियों (244 एसबीआई खाते और 1053 गैर-एसबीआई) के बैंक खातों में धोखाधड़ी से पैसे जमा किए गए थे। जिन लोगों के खातों में यूएचबीवीएन से धनराशि ग्रेच्युटी और एरियर के फर्जी भुगतान के लिए जमा की है, उनके बैंक स्टेटमेंट से पता चला कि जमा की गई राशि को बाद की तारीखों में बैंक से नकद निकाल लिया गया। इसमें करीब 56 करोड़ का गबन सामने आया।