चंडीगढ़। संपत्ति कर का नोटिस देखकर विभिन्न गांवों के हजारों लोगों के होश उड़े हुए हैं। लोगों का आरोप है कि नगर निगम ने वर्ष 2004 से संपत्ति कर का नोटिस ब्याज सहित भेज दिया है, जो किसी का 15 हजार तो किसी का 30 हजार रुपये है। नगर निगम की पिछली सदन की बैठक में भी यह मुद्दा उठा था, लेकिन अब तक इसका कोई समाधान नहीं निकला है। हालांकि अब मेयर अनूप गुप्ता का कहना है कि वह सदन की अगली बैठक में इसे लेकर एजेंडा लाएंगे।अकाली दल के पार्षद हरदीप सिंह ने बताया कि गांवों में वर्ष 2004 में संपत्ति कर लागू किया गया था। बहुत से लोगों ने उस समय संपत्ति कर जमा कराया, लेकिन अब कई साल हो जाने की वजह से उनके पास पुरानी रसीदें नहीं हैं। नगर निगम ने बड़हेरी और सेक्टर-40 समेत शहर के गांवों के ज्यादातर लोगों को 2004 से संपत्ति कर जोड़ कर भेज दिया है। हजारों रुपये के संपत्ति कर के नोटिस लोगों के पास पहुंचे है, जिससे वह सभी परेशान हैं।
अब जिन लोगों के पास पुरानी रसीदें हैं, उन्हें निगम में जाकर ठीक कराना पड़ रहा है, लेकिन समस्या उन लोगों के साथ है, जिन्होंने कर जमा कराया है लेकिन उनकी रसीदें गुम हो चुकी हैं। हरदीप सिंह ने कहा कि नगर निगम के पास कोई रिकॉर्ड नहीं है, जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह गलत है इसलिए पुराने बिलों को माफ करना चाहिए और एक नियम बनाकर नए सिरे से पिछले दो साल का ही संपत्ति कर लोगों से वसूला जाना चाहिए।
सदन की पिछली बैठक में जब हरदीप सिंह ने यह मुद्दा उठाया था तो सांसद किरण खेर भी हैरान हुईं थीं। सीनियर डिप्टी मेयर कंवरजीत सिंह राणा ने भी कहा था कि उनके इलाके में भी लोगों को 2004 से जोड़ कर संपत्ति कर भेजे गए हैं।
हर साल होना चाहिए सर्वे : राणा
शहर के सीनियर डिप्टी मेयर कंवरजीत सिंह राणा ने कहा कि गांव में 2004 में संपत्ति कर लागू हुआ था लेकिन निगम की तरफ से 2018 में कर की वसूली के लिए नोटिस भेजना शुरू किया गया था। अब संपत्ति कर के बिलों में पिछले कई सालों का एरियर जोड़ कर भेजा जा रहा है, जिससे राशि कई गुना ज्यादा बढ़ गई है। इससे गांवों के अधिकतर लोग परेशान हैं। राणा ने कहा कि नगर निगम को हर साल सर्वे करना चाहिए ताकि यह पता लगाया जा सके कि पिछले कुछ सालों में स्थितियां कितनी बदल गई हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 में अगर किसी घर में पांच दुकानें थीं तो अब दो ही रह गई हैं, लेकिन निगम की तरफ से अभी भी पांच दुकान होने का ही नोटिस भेजा जा रहा है, इसलिए सर्वे करना बहुत जरूरी है।
केस-1
बड़हेरी के एक दुकानदार का वर्ष 2023-24 का संपत्ति कर 741 रुपये है, लेकिन बिल में 30,193 रुपये एरियर जोड़ा गया है।
केस-2
बड़हेरी के ही एक अन्य दुकानदार का वर्ष 2023-24 का संपत्ति कर 741 रुपये है, लेकिन बिल में 27,361 रुपये एरियर जोड़ा गया है।
केस-3
सेक्टर-40 के एक घर का वर्ष 2023-24 का संपत्ति कर 741 रुपये है, लेकिन बिल में 13,777 रुपये एरियर जोड़ा गया है।
-वर्जन-
सदन की बैठक में यह मुद्दा उठा था। इस पर नगर निगम काम कर रहा है और अगली बैठक में संपत्ति कर से संबंधित विभिन्न मुद्दों को लेकर एक एजेंडा लेकर आएंगे।
- अनूप गुप्ता, मेयर