पंजाब में प्रॉपर्टी टैक्स का मुद्दा इन दिनों छाया हुआ है। गत शनिवार और रविवार को अकाली-भाजपा नेताओं के बीच चले परस्पर विरोधी बयानबाजी के बाद मंगलवार को पंजाब भाजपा कोर कमेटी की बैठक में इस मुद्दे पर खूब गर्मा-गर्म बहस हुई।
इससे साफ संकेत मिला है कि आने वाले दिनों में प्रॉपर्टी टैक्स पर गठबंधन की अंदरूनी सियासत गर्माने जा रही है। मुख्य रूप से अरुण जेटली की अमृतसर लोकसभा सीट से हार ने इस मसले को ज्यादा हवा दी है। चुनाव प्रचार के दौरान जेटली को प्रॉपर्टी टैक्स की वजह से लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा था।
इस पर उन्होंने वादा किया था कि चुनाव के बाद इसे समाप्त करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। अकाली-भाजपा गठबंधन ने इसके लागू होने के लिए केंद्र की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया था। अब केंद्र में एनडीए सरकार बन चुकी है, तो गठबंधन के लिए इस टैक्स को हटाना जरूरी हो गया है।
कोर कमेटी की बैठक में भाजपा कोटे की अधिकतर विधानसभा सीटों पर गठबंधन के पिछड़ने के लिए शिअद को जिम्मेदार ठहराने और प्रॉपर्टी टैक्स सहित कानून-व्यवस्था, रेत-बजरी की कमी, ड्रग तस्करी, बिजली दरों आदि पर सख्त स्टैंड लेने संबंधी लिए गए फैसले ने एक बात तय कर दी है कि सहयोगी दलों के बीच आने वाले दिनों में लकीर खिंच सकती है। जेटली की हार सहित अन्य विधानसभा सीटों पर गठबंधन के पिछड़ने के कारणों की समीक्षा के लिए गठित कमेटी की रिपोर्ट पर दोनों के बीच के संबंध काफी हद तक निर्भर करेंगे।
वैसे जानकारों का यह भी कहना है कि मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं के संबंध इतने अच्छे हैं कि उक्त मुद्दों का ज्यादा प्रभाव गठबंधन पर पड़ने वाला नहीं है। बहरहाल सभी की निगाहें समीक्षा कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं, क्योंकि इसके बाद ही पंजाब भाजपा संगठन और प्रदेश सरकार में पार्टी के मंत्रियों का भविष्य निर्भर है।