चंडीगढ़ यूटी प्रशासन ने इलेक्ट्रिक वाहन नीति जारी कर दी है। चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (क्रेस्ट) की तरफ से बनाई गई नीति में ईवी क्षेत्र में स्टार्टअप करने वाले युवाओं को भी प्रोत्साहित करने का प्रावधान किया है। इसके तहत पहले 10 स्टार्टअप्स को इंफ्रास्ट्रक्चर इंसेंटिव के साथ पेटेंट फीस की अदायगी में भी प्रशासन मदद करेगा।
प्रशासन की ईवी नीति के अनुसार इस योजना का लाभ उन स्टार्ट अप्स को ही मिलेगा जो अपने स्टार्टअप को चंडीगढ़ में पंजीकृत कराएंगे। प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि ईवी के क्षेत्र में स्टार्टअप बड़ी भूमिका निभा सकते हैं इसलिए इन्हें बढ़ावा देने का प्रावधान किया गया है। इंफ्रास्ट्रक्चर इंसेंटिव कैटेगरी में जीरो एमिशन मोबिलिटी वाले पहले 10 स्टार्टअप्स को प्रति सीट मासिक आधार पर तीन हजार रुपये की ग्रांट दी जाएगी जो अधिकतम 18 हजार रुपये महीना होगी। इसके अलावा पेटेंट फीस अदायगी का भी लाभ मिलेगा। पहले 10 स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रजिस्टर्ड पेटेंट के लिए फीस व अन्य खर्च के 50 प्रतिशत तक की अदायगी की जाएगी। राष्ट्रीय के लिए ये अधिकतम 2 लाख रुपये और अंतरराष्ट्रीय के लिए ये राशि अधिकतम 5 लाख रुपये तक होगी।
यह भी पढ़ें : हाईकोर्ट पहुंचा मामला: वकील से छेड़छाड़ के आरोप में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पर केस दर्ज
स्टार्टअप्स का चंडीगढ़ में होना चाहिए ऑफिस
योजना का लाभ लेने के लिए स्टार्टअप्स को वैध प्रमाण पत्र के साथ स्टार्टअप इंडिया के साथ रजिस्टर्ड होना जरूरी है। स्टार्टअप का चंडीगढ़ में रजिस्टर्ड ऑफिस होना जरूरी है। इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर व ईको सिस्टम से जुड़े जिनके प्रोडक्ट्स या सर्विसेज हैं, उन्हीं स्टार्टअप्स को स्कीम का फायदा मिल सकता है। नीति के तहत उन ईवी बैटरियों के पुन: उपयोग को भी प्रोत्साहित किया जाएगा जो पुरानी हो चुकी हैं। बैटरी के सहयोग से रीसाइक्लिंग व्यवसायों की स्थापना करने का प्रयास किया जाएगा।