सेना के एक ब्रिगेडियर का प्रमोशन मेजर जनरल पद के लिए हो गया, लेकिन मेरिट लिस्ट उस समय सामने आई जब वे रिटायर हो चुके थे। मेरिट लिस्ट ही दस हफ्ते के बजाय 17 हफ्ते बाद आई थी।
यदि समय रहते मेरिट लिस्ट जारी हो जाती तो वे मेजर जनरल बन चुके होते है और उनकी तीन साल की नौकरी भी बढ़ जाती। रिटायर्ड ब्रिगेडियर ने अब इस मामले को चंडीगढ़ आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल में दायर किया है।
ट्रिब्यूनल ने उनकी याचिका को स्वीकार कर रक्षा मंत्रालय और सेना को नोटिस जारी कर दिए हैं। याचिकाकर्ता के एडवोकेट राजीव आनंद ने इस मामले में साजिश की आशंका भी जताई है।
25 अप्रैल को पूरी हुई सिलेक्शन प्रक्रिया
एनसीसी चंडीगढ़ के ग्रुप कमांडर ब्रिगेडियर जतिंदर सिंह अरोड़ा 1982 बैच के अधिकारी रहे और सेना में उनका एक बेहतरीन रिकार्ड रहा है। 2009 में उनका ब्रिगेडियर की पोस्ट के लिए प्रमोशन हुआ। उसके बाद से वे मेजर जनरल के पद के लिए फिट करार दिए गए।
इसी साल आर्मी की मिलिट्री सेक्रेट्री ब्रांच ने कमांड और स्टाफ स्ट्रीम में मेजर जनरल के पद के लिए 45 वैकेंसी निकाली, जिसके बाद 25 अप्रैल, 2014 को सिलेक्शन बोर्ड की प्रक्रिया पूरी हुई।
रक्षा मंत्रालय के नियम के मुताबिक मेरिट का रिजल्ट आठ से दस हफ्ते के बीच आना चाहिए था, लेकिन रिजल्ट की सूचना ब्रिगेडियर अरोड़ा को उस समय मिली जब वे अपने मौजूदा पद पर रहते हुए 31 अगस्त को रिटायर हो गए। उनका आरोप है कि रिजल्ट लेट आने में सीधे तौर पर आर्मी ही जिम्मेदार है।
मेरिट लिस्ट में दूसरा नंबर ब्रिगेडियर का
एडवोकेट राजीव आनंद का कहना है कि 22 अगस्त को उनके प्रमोशन की अप्रूवल आ गई थी लेकिन कागजी कार्रवाई और ढुलमुल रवैये के कारण ब्रिगेडियर अरोड़ा को समय रहते प्रमोशन नहीं मिला सका।
जबकि उन्होंने 24 अगस्त को बोर्ड के सामने अपना पक्ष भी रखा था। जब परिणाम निकला तो मेरिट लिस्ट में ब्रिगेडियर का नंबर दूसरा था। ऐसे में उनके साथ अन्याय हुआ है। जाहिर सी बात है कि परिणाम लेट आने से सिर्फ ब्रिगेडियर ही नहीं बल्कि कई अन्य लोग भी प्रभावित हुए होंगे।