चंडीगढ़ को कचरे के पहाड़ से निजात दिलाने के लिए दाखिल जनहित याचिका में नगर निगम की ओर से दाखिल की गई डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट में हाथों से 150 से अधिक बार छेड़छाड़ की गई है। यह आरोप लगाते हुए मामले की जांच की मांग को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने यूटी प्रशासन व नगर निगम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
जनहित याचिका में अर्जी दाखिल करते हुए यह आरोप लगाया गया है कि नगर निगम द्वारा प्रस्तुत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), जिसे एक आईआईटी प्रोफेसर द्वारा कूड़े के ढेर को साफ करने के लिए तैयार किया गया था में वित्तीय अनुमानों पर 150 से अधिक हस्तलिखित छेड़छाड़ की गई थी और यह परिवर्तन करोड़ों रुपये का था। साथ ही यह बताया गया की डीपीआर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 और आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अपशिष्ट प्रबंधन मैनुअल से भी भटक गया है।
अधिवक्ता अमित शर्मा ने कथित रूप से छेड़छाड़ की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पर नगर निगम द्वारा प्रस्तुत की गई जांच के लिए सीपीसी की धारा 151 के तहत अदालत का रुख किया है, जिसे कूड़े के पहाड़ को साफ करने के लिए समाधान देने के लिए दायर किया गया था।
दाखिल अर्जी में यह भी आरोप लगाया गया है कि नगर निगम ने जिस आईआईटी प्रोफेसर की रिपोर्ट सौंपी है, उसके पास इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में विशेषज्ञता है, जबकि कचरा प्रबंधन योजना के लिए जरूरी सिविल इंजीनियरिंग में नहीं है। यह रिपोर्ट 2021 में चंडीगढ़ के डड्डूमाजरा में कूड़े के ढेर को साफ करने के लिए दायर जनहित याचिका में प्रस्तुत की गई थी।
जनहित याचिका में नगर निगम और अन्य राज्य प्राधिकारियों को "वायु प्रदूषण और बार-बार लगने वाली आग, जो हवा में विषाक्त पदार्थों को छोड़ती है, को समाप्त करने के निर्देश देने की मांग की गई है। इससे आसपास के 50,000 से अधिक लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है।
शर्मा ने याचिका में दलील दी थी कि "हमारे अधिकारियों और राजनेताओं द्वारा अपशिष्ट प्रबंधन के बारे में जानने के लिए अध्ययन दौरों पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए...इन सभी अध्ययन दौरों और अपशिष्ट प्रबंधन के बारे में शिक्षा के बावजूद, नगर निगम द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का लगातार उल्लंघन किया जा रहा है।