जीतूंगा एक दिन खुद से यह वादा करो, जितना सोचते हो, कोशिश उससे ज्यादा करो, भले ही रूठे तकदीर, पर हिम्मत न टूटे, बस मजबूत इतना अपना इरादा करो।
पीजीआई के भार्गव सभागार में शुक्रवार को विश्व क्रॉनिक माइलोजेनस ल्यूकेमिया जागरूकता दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में आए मरीज इन लाइनों को सच साबित कर रहे थे। उन मरीजों में उम्र की तीन पीढ़ी के लोग शामिल थे। ब्लड कैंसर से जूझ रहे बच्चों ने जहां स्टेज पर जोरदार प्रस्तुति देकर सभी को आश्चर्य में डाल दिया, वहीं युवा मरीजों ने अपनी सफलता का सफर बयां कर लोगों को चौंका दिया। इतना ही नहीं पिछले 40 साल से मर्ज के साथ जिंदगी गुजार रहे बुजुर्गों ने अपनी इच्छा शक्ति की जीत का सफर सुनाया।
द मैक्स फाउंडेशन के साथ पीजीआई क्लिनिकल हेमेटोलॉजी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, हेमेटोलॉजी और पीडियाट्रिक हेमेटोलॉजी ऑन्कोलॉजी ने मिलकर कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश और जम्मू और कश्मीर से 800 से अधिक मरीज और परिजन शामिल हुए।
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नाक में लगी थी पाइप फिर भी स्टेज पर मचा दिया धमाल
नाक में नली लगी होने के बावजूद पंचकूला के 11 साल के नैतिक ने स्टेज पर शानदार डांस परफारमेंस दिया। कैंसर ग्रस्त बच्चों के साथ उनकी प्रस्तुति देखकर दर्शकों और मरीजों के परिजनों ने खड़े होकर ताली बजाई। नाक में डली पाइप के बारे में पूछने पर नैतिक ने बताया कि ये क्या चीज है, मैं तो बड़ा होकर फौजी बनूंगा। गोली लगेगी फिर भी नहीं रोऊंगा।
नैतिक की मां रजनी ने बताया कि 2022 दिसंबर में अचानक नैतिक को दर्द की शिकायत होने लगी। धीरे-धीरे परेशानी बढ़ती गई। पीजीआई में दिखाया तो पता चला कि ब्लड कैंसर है। डॉक्टरों की मदद से दवा फ्री मिलने लगी। मार्च 2023 में सर्जरी हुई। अब लगातार कीमो चल रहा है।
अनंतनाग के उमरमीर ठीक होकर संभाल रहे बिजनेस
उमर ने बताया कि 2004 में पता चला कि उन्हें ब्लड कैंसर है। उस समय डॉक्टरों ने माता-पिता से कह दिया कि आपका बच्चा ज्यादा दिन जिंदा नहीं रहेगा, जिसके बाद वे लेकर पीजीआई आए। उमर ने कहा, ‘मैं चल नहीं पाता था। मेरे हाथ-पैर और पूरे शरीर में भयंकर दर्द होता था। पीजीआई में मेरा बोन मैरो ट्रांसप्लांट हुआ। अब नियमित रूप से दवा ले रहा हूं, मैं पूरी तरह ठीक हूं। मेरी शादी हो चुकी है। अब मैं अपना बिजनेस संभाल रहा हूं। मेरा एक चार साल का बेटा भी है। मेरी एक ही ख्वाहिश है कि मेरे हाथ हमेशा दूसरों की मदद के लिए उठे।’
38 साल गुजार दिए मर्ज के साथ
लुधियाना की 66 वर्षीय बीना सूद में 38 साल पहले ब्लड कैंसर की पुष्टि हुई थी। बीना ने बताया कि शादी के महज चार साल बाद कैंसर जैसे मर्ज की चपेट में आने की सूचना पर मानो पैरों तले जमीन खिसक गई लेकिन पति विनोद ने हर पल साथ दिया। जहां कमजोर पड़ी वहां हाथ पकड़कर अपने होने का भरोसा दिलाया। पति के साथ और आत्मविश्वास के बल पर कठिन रास्ता आसान होता गया। बीना और उनके पति विनोद बैंक में कार्यरत थे। उनकी दो बेटियां हैं। दोनों लेक्चरर हैं। विनोद ने बताया कि जब उनकी पत्नी ब्लड कैंसर की चपेट में आई, तब देश में उसका इलाज ही नहीं था। इलाज के लिए ऑस्ट्रेलिया ले गए। दवा पर ट्रायल शुरू हुआ तो पीजीआई की तरफ से बीना को उसमें शामिल किया गया। बीना का कहना है कि अब तो यह ख्याल भी नहीं आता कि मैं इतनी गंभीर बीमारी से ग्रस्त हूं।
सामान्य मरीजों के लिए 20 साल पहले इलाज बेहद महंगा था। एक महीने की दवा पर एक लाख से ज्यादा का खर्च आता था। लेकिन अब दवाओं का खर्च घटकर 800 रुपये के मासिक खर्च पर आ गया है। ऐसे में जरूरी है कि लोग अपनी सेहत के प्रति जागरूक बने। नियमित रूप से जांच कराएं। किसी भी मर्ज की पुष्टि होने पर उसका पूर्ण इलाज कराएं।
-डॉ. पंकज मल्होत्रा, प्रमुख, हेमेटोलॉजी मेडिकल ऑन्कोलॉजी, पीजीआई