राजद्रोह के आरोपी पूर्व सीएम हुड्डा के राजनीतिक सलाहकार प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह की गिरफ्तारी होगी या नहीं इसका फैसला आज आएगा। 10 मार्च को अग्रिम जमानत के मामले में हुई सुनवाई के बाद जिला सत्र न्यायाधीश सुशील कुमार गुप्ता की कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखते हुए 14 मार्च को फैसला सुनाने का निर्णय लिया था।
अब सोमवार को तय होगा कि जाट आरक्षण आंदोलन को भड़काने और राजद्रोह के आरोपी प्रो. विरेंद्र सिंह गिरफ्तार होंगे या गिरफ्तारी से बचकर ही पुलिस के सामने अपना पक्ष रख सकेंगे। वहीं रविवार को भी प्रो. विरेंद्र पुलिस के सामने अपना पक्ष रखने नहीं पहुंचे।
इससे पहले मामले में पुलिस और सरकारी वकील अदालत में पेश होकर अपना पक्ष रख चुके हैं। फिर कोर्ट ने मामले में सुनवाई के लिए 14 मार्च तारीख तय की थी। अदालत में विरेन्द्र के वकील ने अग्रिम जमानत के संबंध में याचिका लगाई थी। 10 मार्च को कोर्ट में गिरफ्तारी पर रोक संबंधी याचिका पर भी सुनवाई हुई। अब फैसले पर पुलिस और विरेन्द्र के सहयोगियों की नजर टिकी होगी। बता दें कि पिछली सुनवाई में भी दोनों पक्षों के वकीलों के बीच काफी लंबी बहस हुई थी।
ये है मामला
आरोप है कि प्रोफेसर ने जाट आरक्षण आंदोलन को भड़काया। उनका एक विवादित ऑडियो टेप सामने आया था, जिसमें वे आंदोलन को दूसरे जगह भी शुरू करने की बात कह रहे हैं। इस टेप के आधार पर भिवानी के रिटायर्ड कैप्टन पवन कुमार ने प्रो. विरेंद्र सिंह और दलाल खाप के प्रवक्ता कैप्टन मानसिंह के खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस की ओर से दिए गए समय पर भी प्रोफेसर नहीं आए तो कोर्ट ने उनका गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसी बीच प्रोफेसर के वकील जे. के. गक्खड़ की ओर से कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर कर दी गई। 10 मार्च को सुनवाई के बाद सोमवार को फैसला सुनाया जाना है।