हरियाणा की खट्टर सरकार ने गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में निशुल्क शिक्षा दिलाने के लिए कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। सरकार को खाली सीटों की जानकारी न देने वाले 25 सौ निजी स्कूलों पर मान्यता रद होने का संकट मंडरा रहा है, चूंकि शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा और मौलिक शिक्षा अधिकारियों को डिफाल्टर स्कूलों की जांच करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
जांच में दोषी पाए जाने वाले स्कूलों की मान्यता रद करने केलिए कहा गया है। इससे स्कूल संचालक सकते में हैं। स्कूलों को भी नोटिस जारी कर कहा गया है कि सरकार को अंधेरे में रखने पर क्यों न उनकी मान्यता व एनओसी खत्म कर दी जाए। सरकार ने बीते दिनों एक सप्ताह में खाली सीटें 16 अप्रैल तक सार्वजनिक करने के निर्देश दिए थे, बावजूद इसके स्कूलों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।
याद रहे कि शिक्षा विभाग ने नियम 134ए के तहत निजी स्कूलों में 10 फीसदी सीटें आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए आरक्षित की हैं। लेकिन, स्कूल संचालक इसे मानने में आनाकानी करते आ रहे हैं। एसीएस स्कूल शिक्षा पीके दास ने कहा कि निजी स्कूल संचालकों की मनमानी नहीं चलेगी।
नियमानुसार खाली सीटों पर दाखिला देना ही होगा। उधर, दो जमा पांच मुद्दे जनांदोलन के अध्यक्ष सत्यवीर हुड्डा और स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल परमार ने कड़ी कार्रवाई के लिए सरकार को धन्यवाद दिया है।