संगरूर में मंगलवार को डॉक्टरों ने काले बिल्ले लगाकर सिविल अस्पताल में प्रदर्शन किया। इस दौरान डॉक्टरों ने हड़ताल कर अपना कामकाज मुकम्मल तौर पर बंद रखा और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी। आईएमए के अध्यक्ष डॉ. मनदीप सिंह और उपाध्यक्ष डॉ. अमित सिंगला ने कहा कि मौजूदा समय में चल रही कोरोना महामारी के दौरान डॉक्टर अपनी सेवाएं फ्रंटलाइन पर निभा रहे हैं। वहीं प्रदेश सरकार सेवाएं निभा रहे डॉक्टरों पर ऐसे एक्ट थोप रही है, जिसे इंडियन मेडिकल एसोसिएशन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा।
इस एक्ट को वापस लेने के लिए आईएमए सांसदों, विधायक व अन्य नुमाइंदों को भी ज्ञापन सौंप चुक है। डॉ. एचएस बाली ने कहा कि इससे पहले यह एक्ट अन्य कई राज्यों में लागू किया जा चुका है लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इससे सरकार की दखलअंदाजी और ज्यादा बढ़ गई और इलाज भी महंगा हो गया। इसके अलावा आईएमए ने एमबीबीएस कोर्स की फीस वृद्धि का भी विरोध किया।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस एक्ट को तुरंत वापस न लिया गया तो 28 जुलाई से संघर्ष और तेज किया जाएगा। इस दौरान डॉ. आरएस राय, डॉ. जगमोहन, डॉ. प्रभात कुमार, डॉ. हरप्रीत कौर रेखी, डॉ. रमनबीर कौर, डॉ. दिनेश कुमार, डॉ. राहुल, डॉ. कृष्ण अग्रवाल, डॉ. कमल कांत मौजूद रहे।
गुरदासपुर के निजी अस्पतालों में ओपीडी व इमरजेंसी सेवाएं बंद
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर गुरदासपुर में 90 के करीब निजी अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाएं व ओपीडी पूर्ण रूप से बंद रहीं। डॉक्टर राज्य सरकार के क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट (सीईए) के खिलाफ गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। इस दौरान इन सभी अस्पतालों में करीब रोजाना होने वाली हजारों ओपीडी प्रभावित हुईं। डॉक्टरों की मांग है कि सरकार तुरंत इस एक्ट को वापस लें। गुरदासपुर के सभी निजी अस्पतालों के बाहर डॉक्टरों ने नोटिस बोर्ड चिपका दिए हैं। इसमें लिखा है कि आज हर प्रकार की सेवाएं बंद हैं।
इंडियन मेडिकल ऐसोसिएशन (आईएमए) के बैनर तले निजी अस्पताल व क्लीनिक के डॉक्टरों ने प्रदेश सरकार के क्लीनिक इस्टेब्लिशमेंट एक्ट के खिलाफ हड़ताल की। आईएमए अध्यक्ष नरेश खन्ना ने कहा कि उनकी मांगों की तरफ ध्यान नहीं दिया गया तो संघर्ष को और तेज करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी पंजाब सरकार की होगी।
अध्यक्ष खन्ना ने कहा कि सीईए-2020 को वापस लिया जाए। इसके अलावा मेडिकल कॉलेजों की फीस बढ़ाने के फैसले को भी वापस लिया जाए। मेडिकल फीस इतनी बढ़ा दी गई है कि गरीब परिवार तो क्या डॉक्टर अपने बच्चों को डाक्टर नहीं बना सकेंगे। इसके अलावा छोटे व मध्यम अस्पतालों में एसटीपी/ईटीपी की स्थापना वित्तीय स्थान की कमी के कारण संभव नहीं है, इसीलिए इन्हें छूट देनी चाहिए। इस मौके पर सचिव डॉ. अश्वनी कालिया व डॉ. आरएल तनेजा मौजूद रहे।
होशियारपुर में नहीं खुले क्लीनिक, निजी अस्पताल
पंजाब क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट कानून के विरोध में मंगलवार को जिले के सभी निजी अस्पताल व क्लीनिक बंद रहे। आईएमए अध्यक्ष डॉ. हरीश बस्सी ने कहा कि यह कानून आईएमए से सलाह मशविरा किए बगैर जल्दबाजी में लगाया गया। सरकार ने हमारी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया। सरकार को नींद से जगाने के लिए हमें अपने अस्पताल बंद करने पड़े। सचिव डॉ. तरू कपूर ने कहा कि अगर अब भी सरकार वास्तविक स्थिति को नहीं समझती तो हम अपना आंदोलन बढ़ाने को विवश हो जाएंगे।
तरनतारन: 'सीईए लागू होने महंगा हो जाएगा इलाज'
सूबा सरकार की ओर से क्लीनिकल इस्टेबलिशमेंट एक्ट (सीईए) थोपा जा रहा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस बिल के लागू होने से इलाज महंगा हो जाएगा। यह कहना है इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की जिलाध्यक्ष डॉ. हरिपाल कौर धालीवाल व महासचिव डॉ. दिनेश गुप्ता का। सीईए के खिलाफ मंगलवार को निजी अस्पताल व अल्ट्रासाउंड केंद्र बंद रहे। इस मौके पर डॉ. रमनदीप सिंह, करनैल कौर, वरुण गुप्ता, जीएस संधू, जीएस धालीवाल, केएस चुग, संतोख सिंह, मोनिका गुप्ता, गुरप्रीत सिंह राय, आरडी सिंह मौजूद रहे।